सुकमा का नक्सली झारखंड में मारा गया
छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा पर शीर्ष नक्सली कमांडर ढेर
रांची । डेस्क: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सरनाडा जंगल में बुधवार सुबह एक मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के एरिया कमांडर अरुण उर्फ वरुण उर्फ नीलेश मडकम को मार गिराया. यह मुठभेड़ गोइलकेरा थाना क्षेत्र के सौता इलाके के घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जो लंबे समय से माओवादियों का गढ़ रहा है.
स्वतंत्रता दिवस से पहले पुलिस और सुरक्षा बलों पर संभावित हमले की खुफिया जानकारी के आधार पर यह संयुक्त अभियान चलाया गया था.
13 अगस्त को सुबह करीब 6:00 बजे, चाईबासा जिला पुलिस और कोबरा 209 कमांडो समूह की संयुक्त टीम ने गोइलकेरा थाना क्षेत्र के दुगुनिया-पोसैता-तुम्बागड़ा इलाके में अभियान शुरू किया. जैसे ही सुरक्षा बल आगे बढ़े, जंगल की ढलानों में छिपे माओवादियों ने उन पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई.
सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण माओवादी घने जंगल में पीछे हट गए, जहां उन्होंने पेड़ों की आड़ का सहारा लिया. मुठभेड़ के बाद तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एंटा गांव के निवासी अरुण के शव को बरामद किया, जो एक प्रमुख माओवादी नेता था.
वह कई उग्रवादी हिंसा और हिंसक गतिविधियों के मामलों में वांछित था. मौके से एक एसएलआर राइफल, जिंदा कारतूस और अन्य माओवादी सामग्री भी जब्त की गई.
वरिष्ठ माओवादी नेताओं की गतिविधियों की खुफिया जानकारी
पश्चिमी सिंहभूम पुलिस के अनुसार, 12 अगस्त को मिली खुफिया जानकारी में पता चला था कि मिसिर बेसरा, अनमेल, मेच्छु, अनल, असीम मंडल, अजय मेहता, सागन अंगरिया और अश्विन जैसे वरिष्ठ माओवादी नेता कालहन/सरनाडा जंगल बेल्ट में सक्रिय थे. उनकी टुकड़ी में रवि सरदार, जैकांत, अरुण, संदीप, शिव, रिसिब, उप्तान, सनत, अमित मुंडा और भुनेश्वर उर्फ सलुका कायम सोमवारी जैसे कुख्यात कमांडर शामिल थे.
खुफिया रिपोर्टों से संकेत मिला था कि यह सशस्त्र समूह राष्ट्रीय उत्सव से पहले सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश रच रहा था.
पुलिस ने सारंडा क्षेत्र में तलाशी और कांबिंग ऑपरेशन को और तेज कर दिया है ताकि भागे हुए माओवादी दस्ते के सदस्यों का पता लगाया जा सके.