नक्सल सरेंडर का दौर: 21 नक्सलियों ने 18 हथियार सौंपे
कांकेर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को नई ऊंचाई मिली है. कांकेर जिले के दो प्रमुख एरिया कमेटियों से जुड़े 21 नक्सलियों ने गुरुवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इनके पास से 18 हथियार बरामद हुए, जो अब सुरक्षा बलों के हवाले कर दिए गए. इस समर्पण को ऐतिहासिक बताते हुए अधिकारियों ने इसे मुख्यधारा में लौटने की दिशा में बड़ा कदम करार दिया.
रणनीति में सकारात्मक बदलाव, एनकाउंटर से ज्यादा जोर समर्पण पर
नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत इस महीने पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है. पहले जहां मुठभेड़ों पर फोकस रहता था, अब समर्पण को प्राथमिकता दी जा रही है. नक्सलियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की गोद में लौटना चाहें, तो उनका भव्य स्वागत होगा. अन्यथा, सुरक्षा दलों की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. इस नई नीति का असर तुरंत दिखा. अक्टूबर में ही 208 नक्सलियों ने 109 हथियारों के साथ जगदलपुर में हथियार डाल दिए.
जंगलवार कॉलेज में भव्य समारोह, संविधान की प्रति भेंट
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का स्वागत जंगलवार कॉलेज में रेड कार्पेट बिछाकर किया गया, जो एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) पी. सुंदरराज ने समारोह की अध्यक्षता की और प्रत्येक नक्सली को भारतीय संविधान की एक प्रति सौंपी. आईजी ने कहा, "यह न केवल हथियारों का त्याग है, बल्कि विचारधारा का परिवर्तन भी है. हम इन्हें नई जिंदगी का अवसर दे रहे हैं."
नक्सल नेतृत्व का लगातार क्षय, दक्षिण बस्तर में अंतिम अपील
आईजी सुंदरराज ने नक्सल संगठन की कमजोर पड़ती संरचना पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि कभी पोलिट ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी में 45 सदस्य सक्रिय रहते थे, लेकिन 2025 की शुरुआत तक यह संख्या घटकर 18 रह गई. अब वर्ष के अंत तक महज 6-7 सदस्य ही बचे हैं, जो दक्षिण बस्तर के घने जंगलों में छिपे हुए हैं. आईजी ने इन शेष नक्सलियों से अंतिम अपील की, "समर्पण का द्वार अभी खुला है. मुख्यधारा में लौट आएं, वरना डीआरजी और अन्य सुरक्षा बलों की टीम तैयार हैं."
छत्तीसगढ़ नक्सल आत्मसमर्पण नीति-2025:
छत्तीसगढ़ सरकार ने 10 अप्रैल 2025 से नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 को लागू किया है. यह नीति राज्य को मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ तैयार की गई है. इसका मुख्य उद्देश्य नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिसमें आर्थिक सहायता, पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक एकीकरण जैसे व्यापक प्रावधान शामिल हैं. नीति न केवल समर्पण करने वालों को लाभ देती है, बल्कि उनके परिवार, सुरक्षा बलों और स्थानीय पंचायतों को भी प्रोत्साहन प्रदान करती है. 2025 में अब तक सैकड़ों नक्सलियों के समर्पण से इसकी प्रभावशीलता सिद्ध हो चुकी है.
मुख्य प्रावधान और लाभ
नीति के तहत समर्पण करने वाले नक्सलियों को तत्काल और दीर्घकालिक सहायता सुनिश्चित की गई है. प्रमुख बिंदु निम्न हैं:
आर्थिक सहायता
-आत्मसमर्पण पर तत्काल 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि (पहले 25 हजार थी).
-प्रतिमाह 10 हजार रुपये की सहायता, तीन वर्ष तक.
-स्वचलित हथियारों के समर्पण पर पांच लाख रुपये तक की राशि.
-5 लाख या अधिक इनामी नक्सलियों को अतिरिक्त दो लाख रुपये की संपत्ति सहायता.
आवास और भूमि
तीन वर्ष तक मुफ्त आवास और भोजन की व्यवस्था.
शहरी क्षेत्र में 4 डिसमिल या ग्रामीण क्षेत्र में 1 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रदान की जाएगी.
पीएम आवास योजना के तहत घर निर्माण में सहायता.
कौशल विकास और रोजगार
-कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से स्वरोजगार या नौकरी के अवसर.
-आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए प्राथमिकता आधारित रोजगार योजनाएं.
शिक्षा और परिवार कल्याण
-नक्सलियों के बच्चों को 18 वर्ष तक निःशुल्क शिक्षा (शासकीय और आवासीय विद्यालयों में प्राथमिकता).
-अविवाहित, विधवा या विधुर नक्सलियों को तीन वर्ष के भीतर विवाह के लिए एक लाख रुपये का अनुदान.
प्रोत्साहन अन्य पक्षों के लिए
-नक्सली को प्रेरित करने वाले परिवार को 50 हजार रुपये.
-समर्पण में सहायता करने वाले पुलिस/सुरक्षा कर्मियों को इनामी राशि का 10% (अधिकतम 5 लाख रुपये).
-सामूहिक समर्पण (संगठन की 60% से अधिक इकाई) पर प्रोत्साहन राशि दोगुनी.
-विस्फोटक बरामदगी पर पुरस्कार: 5 किलो आईईडी पर 15,000 रुपये, 10 किलो पर 25,000 रुपये, बड़े डंप पर एक लाख रुपये.
पंचायत और क्षेत्रीय विकास
-अति नक्सल प्रभावित विकासखंड में सभी नक्सलियों के समर्पण पर पंचायत को नक्सल-मुक्त घोषित कर 1 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत** (कुछ स्रोतों में 4 करोड़ का उल्लेख).
-स्थानीय समुदायों को समर्पण प्रक्रिया में भागीदारी के लिए प्रोत्साहन.
पात्रता मानदंड
-नक्सलियों के लिए: सक्रिय नक्सली संगठन से जुड़े व्यक्ति, जो स्वेच्छा से हथियार डालें. इनामी नक्सलियों को अतिरिक्त लाभ. अन्य राज्यों के नक्सलियों को भी पात्रता.
-परिवार और प्रेरकों के लिए: नक्सली के सीधे स्वजन या समर्पण में सहायक व्यक्ति.
-सुरक्षा बलों के लिए: समर्पण प्रक्रिया में प्रत्यक्ष योगदान वाले कर्मी.
-पंचायतों के लिए: पूर्ण समर्पण सुनिश्चित करने वाले नक्सल प्रभावित क्षेत्र.
अपवर्जन: गंभीर अपराधों (जैसे हत्या) में शामिल नक्सलियों के प्रकरणों पर अलग से विचार, लेकिन योगदान के आधार पर छूट संभव.
समर्पण प्रक्रिया
-प्रारंभिक चरण: नक्सली स्वेच्छा से या परिवार/पुलिस की प्रेरणा से संपर्क करें. 'पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन' जैसी योजनाओं के तहत सहायता.
-सत्यापन: जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति (पुलिस अधीक्षक सहित) द्वारा पहचान और पात्रता जांच.
-आत्मसमर्पण समारोह: हथियार जमा करने के बाद रेड कार्पेट स्वागत, संविधान प्रति भेंट.
-पुनर्वास: लाभ वितरण, प्रशिक्षण और निगरानी. आपराधिक प्रकरणों का समापन योगदान के आधार पर.
-निगरानी: जिला समितियां कार्यान्वयन सुनिश्चित करेंगी.
नीति का प्रभाव और अपील
2025 में बीजापुर, कांकेर जैसे जिलों में 400 से अधिक नक्सलियों का समर्पण इस नीति की सफलता दर्शाता है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे "पुनर्वास की रोशनी" बताया है. शेष नक्सलियों से अपील है कि वे अभी समर्पण करें, वरना कार्रवाई का सामना करें. यह नीति नक्सलवाद के खात्मे में मील का पत्थर साबित हो रही है, जो हिंसा के बजाय मानवीय दृष्टिकोण पर जोर देती है. (AI Gererated symbolic photo)