नक्सली नेता पापा राव का 17 साथियों के साथ समर्पण
जगदलपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में लंबे समय से सक्रिय माओवादी नेता पापा राव ने मंगलवार को पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
बस्तर में दोरला जनजाति के कम ही आदिवासी ऐसे हैं, जो माओवादी संगठन में नेतृत्व के स्तर तक पहुंचे. यही कारण है कि पापा राव ऊर्फ सुनम चंद्राया ऊर्फ मंगू दादा ऊर्फ चंद्रन्ना को पुलिस एक बड़ी सफलता मान कर चल रही है.
पापा राव के साथ 17 अन्य नक्सलियों ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण किया है.
सुरक्षा बलों का मानना है कि पापा राव के आत्मसमर्पण से बस्तर क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. साथ ही, इससे अन्य थोड़े बचे हुए माओवादियों पर भी मुख्यधारा में लौटने का दबाव बढ़ सकता है.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पापा राव ने करीब पंद्रह दिन पहले एक विश्वसनीय मध्यस्थ के जरिए संपर्क स्थापित किया था. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पापा राव से लगातार संवाद बनाए रखा और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें सुरक्षा, आर्थिक सहायता और समाज में पुनः बसने का अवसर मिलेगा।
पापा राव के पास छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा क्षेत्र में सक्रिय रहे और सीपीआई (माओवादी) की पश्चिम क्षेत्रीय समिति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी. संगठन की रणनीतिक गतिविधियों और कैडर संचालन में प्रमुख भूमिका रही है.
मीडिया से बातचीत में पापा राव ने कहा कि लगातार दबाव, जंगलों में कठिन जीवन और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब वे सामान्य जीवन जीना चाहते हैं और समाज के विकास में योगदान देना चाहते हैं.