31 दिसंबर को गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल : छत्तीसगढ़ में भी असर
नई दिल्ली । डेस्क: छत्तीसगढ़ सहित देशभर में सक्रिय गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स ने 31 दिसंबर बुधवार को एक बड़ी देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के नेतृत्व में होने वाले इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य 10 मिनट की डिलीवरी सेवा को बंद करना और पुराने भुगतान ढांचे को बहाल करना है.
इस हड़ताल से छत्तीसगढ़ सहित देशभर में जोमैटो, स्विगी तथा अन्य डिलीवरी सेवाओं पर असर पड़ेगा. इस कारण इस बुधवार को सड़कों पर गिग वर्कर्स की दौड़ती गाड़ियां थम जायेंगी.
यूनियन के अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन के अनुसार, कंपनियों द्वारा लागू किया गया 'फास्ट-डिवरी मॉडल' श्रमिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है. उन्होंने कहा कि एल्गोरिदम-आधारित प्रबंधन प्रणाली के कारण वर्कर्स की कमाई में भारी गिरावट आई है. उनकी मुख्य मांगें हैं:
10 मिनट की डिलीवरी का अंत: राइडर्स का कहना है कि कम समय में डिलीवरी के दबाव के कारण वे अपनी जान जोखिम में डालकर वाहन चलाने को मजबूर हैं.
पुराना पेमेंट स्ट्रक्चर: वर्कर्स मांग कर रहे हैं कि त्योहारों और सामान्य दिनों में मिलने वाले पुराने इंसेंटिव और पेमेंट सिस्टम को वापस लाया जाए.
कानूनी मान्यता: गिग वर्कर्स को श्रम कानून के तहत 'कर्मचारी' का दर्जा दिया जाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ मिलें.
महिला सुरक्षा और छुट्टियां: महिला वर्कर्स के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा, मातृत्व अवकाश और आपातकालीन छुट्टियों की मांग की गई है.
यूनियन का दावा है कि इस हड़ताल में देशभर के लगभग 1.5 लाख से अधिक वर्कर्स शामिल हो सकते हैं. इससे पहले 25 दिसंबर को हुए सांकेतिक प्रदर्शन में करीब 40,000 वर्कर्स ने हिस्सा लिया था, जिससे 50-60% डिलीवरी प्रभावित हुई थी. सलाउद्दीन ने चेतावनी देते हुए कहा, "25 दिसंबर को जो हुआ वह सिर्फ एक ट्रेलर था; असली तस्वीर 31 दिसंबर को दिखाई देगी."
शेख सलाउद्दीन ने आरोप लगाया कि कंपनियां हड़ताल में शामिल होने वाले वर्कर्स को डरा रही हैं. उन्होंने दावा किया कि वेयरहाउस के बाहर बाउंसर्स तैनात किए गए हैं और विरोध करने वाले राइडर्स की आईडी ब्लॉक करने की धमकी दी जा रही है.
दिल्ली में महिलाओं के नेतृत्व वाली यूनियन GIPSWU ने भी हड़ताल का समर्थन किया है. वहीं, पटना जैसे शहरों से आ रही रिपोर्ट्स बताती हैं कि डिलीवरी राइडर्स ट्रैफिक नियमों को तोड़कर 80-90 किमी/घंटा की रफ्तार से गाड़ी चलाने को मजबूर हैं ताकि ऐप पर उनकी रेटिंग और इंसेंटिव सुरक्षित रहें.
गिग वर्कर्स की इस एकजुटता ने केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ा दिया है कि वे इस असंगठित क्षेत्र के लिए उचित नीति और सुरक्षा तंत्र तैयार करें.