म्यांमार साइबर ठगी: दुर्गापुर और छत्तीसगढ़ में NIA का छापा
रायपुर । संवाददाता: मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शिकंजा कसते हुए छत्तीसगढ़ के जगदलपुर और पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में ताबड़तोड़ छापेमारी की है. विदेश में सुरक्षित नौकरी का सपना दिखाकर निर्दोष भारतीय युवाओं को म्यांमार की अवैध कंपनियों में धकेलने वाले इस खतरनाक सिंडिकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं.
यह पूरा मामला हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष एनआईए अदालत में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद और गहरा गया है.
आरोपियों में अंकित कुमार, इश्तिखार अली और लीसा नाम की एक फरार चीनी नागरिक शामिल हैं, जिन पर भारतीय न्याय संहिता और प्रवासन अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. शुरुआत में हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज इस केस को बाद में एनआईए ने अपने हाथों में ले लिया था.
जांच के दौरान सामने आई कार्यप्रणाली के अनुसार, अंकित और इश्तिखार भारतीय युवाओं को थाईलैंड में वैध और आकर्षक नौकरी दिलाने का झांसा देते थे.
इसके बाद म्यांमार में बैठी चीनी नागरिक लीसा के जरिए उनका ऑनलाइन इंटरव्यू कराया जाता था, जिससे पीड़ितों को पूरी प्रक्रिया पर यकीन हो जाए. युवाओं को भारत से पहले थाईलैंड बुलाया जाता था और फिर वहां से गुप्त रास्तों के जरिए अवैध रूप से म्यांमार के म्यावाडी इलाके में पहुंचा दिया जाता था.
म्यांमार पहुंचते ही युवाओं के सपने भयावह दुस्वप्न में बदल जाते थे. वहां उन्हें बंधक बनाकर जबरन साइबर ठगी के काम में ढकेल दिया जाता था. उनसे सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनवाकर अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के नागरिकों को फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ऐप में निवेश का लालच देने के लिए मजबूर किया जाता था.
यदि कोई युवा इस अवैध काम को करने से मना करता था, तो उसे अमानवीय शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी और परिजनों से रिहाई के बदले मोटी रकम वसूली जाती थी. एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ फेंकने में जुटी है.