केरल पहुंचा मानसून, छत्तीसगढ़ में जल्दी दस्तक की उम्मीद
रायपुर | संवाददाता: दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार को केरल में आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून इस बार सामान्य तिथि 1 जून की तुलना में करीब तीन दिन देरी से केरल पहुंचा है. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे इसकी रफ्तार अनुकूल बनी रही तो मध्य भारत और छत्तीसगढ़ में मानसून की प्रगति सामान्य समय के आसपास हो सकती है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक अगले 2-3 दिनों में मानसून गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के शेष हिस्सों में आगे बढ़ सकता है. साथ ही बंगाल की खाड़ी के और क्षेत्रों तथा पूर्वोत्तर राज्यों में भी इसका विस्तार होने की संभावना है.
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और कृषि काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर है. राज्य में धान प्रमुख फसल है और खरीफ सीजन की बुवाई मानसून की समय पर आमद और पर्याप्त वर्षा पर टिकी रहती है. प्रदेश के लाखों किसान जून के दूसरे पखवाड़े से खेतों की तैयारी और रोपाई की प्रक्रिया शुरू करते हैं.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि मानसून अपनी सामान्य गति बनाए रखता है तो बस्तर संभाग में जून के मध्य तक और रायपुर-दुर्ग समेत मध्य छत्तीसगढ़ में जून के तीसरे सप्ताह तक मानसून पहुंच सकता है. इससे किसानों को बुवाई कार्य शुरू करने में राहत मिलेगी.
प्री-मानसून गतिविधियां बढ़ेंगी
मानसून के आगे बढ़ने से पहले ही छत्तीसगढ़ में प्री-मानसून गतिविधियां तेज होने के संकेत हैं. मौसम विभाग ने मध्य भारत के कई हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है. इसका असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है, जहां अगले कुछ दिनों में कई जिलों में आंधी और बारिश से तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है.
पिछले कुछ सप्ताह से प्रदेश के कई हिस्से भीषण गर्मी और उमस का सामना कर रहे हैं. ऐसे में प्री-मानसून बारिश लोगों को राहत दे सकती है. हालांकि तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने सतर्क रहने की सलाह दी है.
मानसून की सक्रियता बढ़ने से राज्य के प्रमुख जलाशयों, बांधों और नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है. गर्मी के कारण बढ़ी बिजली मांग पर भी असर पड़ेगा. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट से जूझ रहे इलाकों को भी राहत मिलने की संभावना है.
देशभर में मौसम का बदला मिजाज
मानसून केरल पहुंचने के साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल रहा है. केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में अगले सात दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है.
वहीं दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार दोपहर अचानक मौसम बदला. तेज आंधी और बारिश के कारण कई इलाकों में पेड़ गिर गए, सड़कों पर जलभराव हुआ और यातायात प्रभावित रहा. मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी प्री-मानसून गतिविधियों के चलते आंधी-बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है.
आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है और लगभग डेढ़ महीने में पूरे देश को कवर कर लेता है. सामान्य परिस्थितियों में यह जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह तक उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंच जाता है. मानसून की वापसी सितंबर मध्य में राजस्थान से शुरू होती है और अक्टूबर मध्य तक पूरे देश से विदा हो जाता है.
छत्तीसगढ़ के किसानों और आम लोगों की नजरें अब मानसून की अगली चाल पर टिकी हैं. यदि वर्तमान परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जून के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश में अच्छी बारिश की शुरुआत हो सकती है, जो खरीफ सीजन के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.