माओवादियों ने कबूला, एक साल में मारे गए 375 साथी
माओवादियों ने कबूला है कि एक साल में उनके 375 साथी मारे गए हैं
जगदलपुर | संवाददाताः माओवादियों की केन्द्रीय कमेटी ने बुकलेट जारी कर देशभर में मारे गए अपने साथियों का आंकड़ा जारी किया है. माओवादियों ने कबूल किया है कि साल भर में उनके 375 साथी मारे गए हैं. जिसमें 4 सीसी (सेंट्रल कमेटी) मेंबर और 16 राज्य कमेटी के बड़े चेहरे भी शामिल हैं.
वहीं मारे गए माओवादियों में 136 महिलाएं भी शामिल हैं. माओवादियों ने साथ ही कहा है कि मारे गए अपने साथियों की याद में 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाएंगे.
माओवादियों की सेंट्रल कमेटी के नाम से जारी इस 24 पेज के बुकलेट में लिखा है कि सालभर में माओवादियों के पोलित ब्यूरो मेंबर और नक्सल संगठन के महासचिव बसवा राजू समेत सेंट्रल कमेटी के 4 सदस्य, स्टेट कमेटी के 16 सदस्य मारे गए हैं.
माओवादियों ने कबूल किया है कि सबसे ज्यादा नुकसान दंडकारण्य क्षेत्र में हुई है. जहां 281 माओवादी मारे गए हैं. दण्डकारण्य क्षेत्र छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्र है. इसे माओवादियों का मजबूत गढ़ भी माना जाता रहा है.
बुकलेट में माओवादियों ने बताया है कि किन-किन राज्यों में कितने साथी मारे गए हैं. जारी आंकड़ों के मुताबिक, 14 बिहार-झारखंड, 23 तेलंगाना, 281 दंडकारण्य, 9 आंध्र-ओडिशा विशेष क्षेत्र/आंध्र प्रदेश, 8 महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी), 20 ओडिशा, 1 पश्चिमी घाट और 1 पंजाब से हैं. उनके 4 साथी खराब स्वास्थ्य और अनुचित उपचार के कारण, 1 दुर्घटना में, 80 फर्जी मुठभेड़ों में और 269 घेराबंदी हमलों में मारे गए हैं.
मारे गए माओवादियों में बसवा राजू समेत राज्य समिति स्तर के 16, जिला समिति के 23, एसी/पीपीसी के 83, पार्टी के 138 सदस्य, PLGA के 17 सदस्य, जन संगठनों के 6 सदस्य और 34 लोग शामिल हैं.
बस्तर में मारे गए 420 से ज्यादा माओवादी
इधर छत्तीसगढ़ पुलिस की माने तो अकेले बस्तर में 1 जनवरी 2024 से जून 2025 तक हुई 420 से ज्यादा माओवादी मारे जा चुके हैं.
बस्तर में अलग-अलग मुठभेड़ों में साल 2024 में 217 माओवादी मारे गए थे. वहीं इस साल पिछले 6 महीने में ही 200 से ज्यादा माओवादी मारे गए हैं.