ममता की हुंकार: वोटर लिस्ट से नाम हटाना बर्दाश्त नहीं
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने 21 जुलाई 2025 को धरमतला की विशाल जनसभा में आगामी 2026 विधानसभा चुनाव के लिए वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि बिहार की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी वोटर लिस्ट से लाखों लोगों के नाम हटाने की साजिश हो रही है, जिसे वे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगी.
ममता ने अपनी पार्टी और संगठन को स्पष्ट निर्देश दिया कि विधानसभा चुनाव के नामांकन तक किसी भी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटने नहीं देना है. उन्होंने कहा, "अगर बंगाल में किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया, तो जरूरत पड़ी तो घेराव किया जायेगा."
ममता ने बीजेपी के 'अवैध घुसपैठिए' वाले दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी का यह दावा कि बंगाल की वोटर लिस्ट में 17 लाख रोहिंग्या हैं, पूरी तरह आधारहीन है.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि विश्व भर में रोहिंग्या की संख्या 10 से 13 लाख के बीच है, तो बंगाल में 17 लाख का आंकड़ा कहां से आया? ममता ने बीजेपी पर बंगाली भाषा और बंगालियों पर हमला करने का आरोप लगाया, खासकर मतुया और राजबंशी समुदायों को निशाना बनाने का.
उन्होंने बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली भाषियों पर कथित अत्याचारों का भी जिक्र किया. ममता ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने मई और जुलाई 2025 में नई गाइडलाइंस जारी कर कई राज्यों को बंगाली भाषियों को संदिग्ध मानकर डिटेंशन कैंप में भेजने का निर्देश दिया है.
उन्होंने इसे बंगाली भाषा और संस्कृति पर 'आतंक' करार देते हुये कहा, "यह सनातन बंगाली संस्कृति पर हमला है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे."
ममता ने बीजेपी की रणनीति को तृणमूल के मुस्लिम वोट बैंक को कमजोर करने की साजिश बताया, जबकि बीजेपी का दावा है कि वोटर लिस्ट में शामिल 'अवैध' नामों में 90% सांख्यिक अल्पसंख्यक मुस्लिम हैं, जिन्हें वे बांग्लादेशी घुसपैठिए मानते हैं.
ममता ने इसे बंगाली भाषियों पर हमला बताकर पलटवार किया और बंगाल के बाहर बंगाली समुदायों, जैसे दिल्ली, ओडिशा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में हो रहे कथित उत्पीड़न का मुद्दा भी उठाया. तृणमूल ने इन राज्यों में बंगालियों के खिलाफ बिजली-पानी काटने जैसे कदमों का विरोध किया है.
2024 की तुलना में इस साल ममता का रुख अधिक आक्रामक दिखा. पिछले साल उनकी सभा में ईडी-सीबीआई के दुरुपयोग का जिक्र था, लेकिन इस बार उन्होंने 'बंगाली अस्मिता' को केंद्र में रखकर बीजेपी पर सीधा हमला बोला.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के 'घुसपैठिये' वाले बयान ने ममता को 'बंगाली अस्मिता' के मुद्दे को और धारदार बनाने का मौका दे दिया है, जिसे वे 2026 के चुनाव में भुनाने की तैयारी में हैं.