छत्तीसगढ़ का महासमुंद बना गांजा तस्करी का मुख्य ट्रांजिट कॉरिडोर, 10 टन गांजा जब्त
महासमुंद जिला ओडिशा के गांजा उत्पादक क्षेत्रों को महाराष्ट्र, यूपी और एमपी जैसे राज्यों से जोड़ने वाले प्रमुख अंतरराज्यीय तस्करी कॉरिडोर के रूप में उभरा है. पुलिस ने इस साल 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का 10,000 किलो गांजा जब्त कर 501 तस्करों को गिरफ्तार किया है.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला अंतरराज्यीय नशीले पदार्थों की तस्करी का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. साल 2026 के शुरुआती नौ महीनों में पुलिस द्वारा जब्त किया गया लगभग 10,000 किलोग्राम (10 टन) गांजा यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह क्षेत्र ओडिशा के गांजा उत्पादक इलाकों को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाजारों से जोड़ने वाला मुख्य ट्रांजिट कॉरिडोर बन चुका है.
जब्त किए गए गांजे की अनुमानित कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है.
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल 177 मामलों में कार्रवाई करते हुए 501 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 70 अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है.
महासमुंद पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के अनुसार, पकड़ी गई खेप का बड़ा हिस्सा ओडिशा के कालाहांडी (2,679 किग्रा), कंधमाल (2,153 किग्रा), बौध, रायगढ़, सोनपुर और बलांगिर जिलों से आया था.
इस तस्करी में सबसे बड़ा गंतव्य महाराष्ट्र रहा, जहां कुल जब्त मात्रा का लगभग आधा हिस्सा (4,511 किग्रा) भेजा जा रहा था. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 2,263 किग्रा और मध्य प्रदेश में 1,223 किग्रा गांजा खपाने की योजना थी.
जांच अधिकारियों ने इस बार केवल वाहन चालकों को पकड़ने के बजाय तस्करी के पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसा है. गिरफ्तार 501 लोगों में से 289 ट्रांसपोर्टर थे, जबकि 145 आरोपियों को ओडिशा से "बैकवर्ड लिंकेज" यानी मुख्य स्रोत की जांच के तहत पकड़ा गया.
वहीं "फॉरवर्ड लिंकेज" के आधार पर माल मंगाने वाले खरीदारों की भी गिरफ्तारियां की गईं. नेटवर्क में शामिल गिरफ्तार लोगों में 162 आरोपी ओडिशा के, 138 छत्तीसगढ़ के, 103 महाराष्ट्र के, 73 मध्य प्रदेश के और 54 उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं.
तस्कर पुलिस से बचने के लिए एम्बुलेंस, कूरियर वैन, फल-सब्जी के ट्रक, पिकअप, बस और बाइक जैसे साधनों का इस्तेमाल कर रहे थे. गांजे को छिपाने के लिए वाहनों में विशेष गुप्त केबिन बनाए गए थे.
पुलिस ने इस दौरान तस्करी में इस्तेमाल 10 करोड़ रुपये मूल्य के वाहन भी जब्त किए हैं. जिले के सिंघोड़ा, कोमाखान और बसना पुलिस थाना क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बरामदगी हुई है. जांच में यह भी सामने आया है कि चेकिंग से बचने और यात्रा को पारिवारिक दिखाने के लिए तस्कर महिलाओं और बच्चों को भी ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे.