ट्रेन रूट बदलने की नहीं दी जानकारी, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर लगाया जुर्माना
ट्रेन के डायवर्जन की अग्रिम सूचना न देना भारतीय रेलवे को भारी पड़ गया. रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने सूचना न देने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए रेलवे पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है.
रायपुर । संवाददाता: सूचना न देने और लापरवाही बरतने के एक मामले में छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भारतीय रेलवे के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने पीड़ित महिला यात्री को मानसिक कष्ट और असुविधा के एवज में लगभग 15,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश सुनाया है.
मामला 18 जून 2016 का है, जब पीड़िता ने बिलासपुर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (3rd AC) में रायपुर से दिल्ली के लिए 1,980 रुपये में टिकट बुक कराया था. जब महिला रायपुर स्टेशन पहुंची, तो उन्हें पता चला कि मध्य प्रदेश के इटारसी में रूट रिले इंटरलॉकिंग सिस्टम में आग लगने के कारण ट्रेन अपने तय रास्ते (रायपुर-नागपुर) के बजाय कटनी-बीना होकर दिल्ली के लिए रवाना कर दी गई है.
अंतिम समय में सूचना मिलने के कारण महिला को अपनी यात्रा रद्द कर स्टेशन पर ही रिफंड लेना पड़ा.
आयोग के अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा तथा सदस्य निरुपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि रेलवे की असली गलती ट्रेन का रूट बदलना नहीं, बल्कि यात्री को इसकी पूर्व सूचना न देना था. आयोग ने कहा कि उपभोक्ता ने बुकिंग के समय अपना मोबाइल नंबर दिया था, फिर भी उसे कोई एसएमएस या कॉल नहीं भेजा गया.
आयोग के अनुसार, यात्रियों को जानकारी देना एक अनिवार्य सेवा है और रेलवे अन्य साधनों से भी यात्री को सूचित कर सकता था.
रेलवे ने अपनी सफाई में तर्क दिया कि इटारसी में आग लगना एक अनपेक्षित तकनीकी आपातस्थिति थी और उस समय (दिसंबर 2017 से पहले) यात्रियों को एसएमएस भेजने का कोई औपचारिक नियम लागू नहीं था. साथ ही यात्री को पूरे पैसे का रिफंड भी दे दिया गया था.
हालांकि, आयोग ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि केवल रिफंड देने से यात्री को हुई मानसिक परेशानी कम नहीं हो जाती. संपर्क सूत्र उपलब्ध होने के बावजूद सूचना न देना सेवा में स्पष्ट कमी है.
यह फैसला स्पष्ट करता है कि तकनीकी वजहों से ट्रेन प्रभावित होने के बावजूद रेलवे यात्रियों को सूचित करने की अपनी मूल जिम्मेदारी से बच नहीं सकता. यदि कोई यात्री इस तरह की समस्या का सामना करता है, तो वह जिला या राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है, या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) और छत्तीसगढ़ उपभोक्ता हेल्पलाइन (1800-233-3663) पर संपर्क कर सकता है.