HC: सलवा जुडूम से CAPF में शामिल जवानों के सेवा अधिकारों पर राज्य सरकार को नोटिस
सलवा जुडूम के बाद छत्तीसगढ़ सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में शामिल किए गए जवानों के सेवा लाभों और समान अवसर को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है. मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है.
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण याचिका पर नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. यह याचिका सलवा जुडूम अभियान से जुड़े उन पूर्व कर्मियों से संबंधित है, जिन्हें बाद में छत्तीसगढ़ सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में शामिल किया गया था.
याचिकाकर्ताओं ने सरकारी सेवा में समान अवसर, उचित सेवा लाभ और अपने साथ हो रहे कथित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए अदालत से न्याय की गुहार लगाई है.
मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया. याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता) के उल्लंघन का हवाला दिया गया है.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 के आसपास बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के रूप में 'सलवा जुडूम' की शुरुआत हुई थी, जिसके तहत कई स्थानीय युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) नियुक्त किया गया था.
हालांकि, वर्ष 2011 में उच्चतम न्यायालय ने नक्सल विरोधी अभियानों में SPO के उपयोग पर रोक लगा दी थी. इसके बाद, इस आंदोलन से जुड़े कर्मियों को राज्य के सशस्त्र पुलिस बल में समायोजित किया गया था.
अब याचिकाकर्ताओं ने अपने सेवा-संबंधी अधिकारों और सेवा शर्तों पर उचित विचार करने की मांग की है. अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता फतेह कुमार साहू और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विद्याभूषण सोनी रख रहे हैं.