महानदी जल विवाद: ओडिशा-छत्तीसगढ़ समाधान करेंगे
नई दिल्ली । डेस्क: ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. बुधवार को भुवनेश्वर के लोक सेवा भवन में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई.
बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के सहयोग से आपसी वार्ता के जरिये इस विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान ढूंढना था. मुख्यमंत्री माझी ने केंद्रीय जल आयोग की धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुये दोनों राज्यों के बीच सीधी बातचीत की आवश्यकता पर बल दिया.
उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार और केंद्रीय जल आयोग के तकनीकी सहयोग से हम इस मुद्दे को बातचीत के जरिये हल कर सकते हैं, जिससे दोनों राज्यों के बीच संबंध और मजबूत होंगे."
महानदी जल विवाद का मुख्य मुद्दा नदी के पानी के बंटवारे से जुड़ा है. ओडिशा ने छत्तीसगढ़ के ऊपरी क्षेत्रों में बनाये गये प्रोजेक्ट्स पर आपत्ति जताई है, जिनके कारण निचले क्षेत्रों में पानी का प्रवाह कम हो रहा है, जिससे ओडिशा में कृषि और आजीविका प्रभावित हो रही है.
इससे पहले फरवरी 2025 में राजस्थान में आयोजित अखिल भारतीय जल संसाधन मंत्रियों के सम्मेलन और मार्च 2025 में भुवनेश्वर में विश्व जल दिवस के अवसर पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मोहन चरण माझी और विष्णु देव साय, ने इस मुद्दे को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की प्रतिबद्धता जताई थी.
बैठक में दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर चल रही चर्चा का भी जिक्र हुआ. ओडिशा सरकार को उम्मीद है कि निरंतर संवाद से जल्द ही एक निष्पक्ष और टिकाऊ समाधान निकाला जा सकेगा.
बैठक में एडवोकेट जनरल पितांबर आचार्य, मुख्य सचिव मनोज अहूजा, जल संसाधन विभाग की विकास आयुक्त-सह-अतिरिक्त मुख्य सचिव अनु गर्ग, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव शाश्वत मिश्रा और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों व इंजीनियरों ने हिस्सा लिया.
महानदी जल विवाद का समाधान न केवल समान जल वितरण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है.