बंगाल में शराबबंदी: सात दिनों तक दुकानें बंद रहने से मचा हड़कंप
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल में सोमवार से अचानक शराब की दुकानों और बार पर ताला लटकने से हड़कंप मच गया है. राज्य आबकारी विभाग के इस फैसले ने न केवल सुराप्रेमियों को चौंका दिया है, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया था. मनोज अग्रवाल ने इस फैसले पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि वे आबकारी आयुक्त से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगेंगे कि आखिर कोलकाता और अन्य जिलों में समय से पहले शराब की दुकानें क्यों बंद की गईं.
आमतौर पर चुनाव आचार संहिता के अनुसार, मतदान से केवल 48 घंटे पहले संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में शराब की दुकानें बंद की जाती हैं. 23 अप्रैल को पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान होना है, जिसके लिए नियमानुसार शराबबंदी तर्कसंगत थी.
लेकिन आबकारी विभाग के नए निर्देश ने पूरे राज्य को इसकी जद में ले लिया है. कोलकाता और उत्तर व दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में, जहां दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होना है, वहां भी 20 अप्रैल से ही दुकानें बंद रखने का आदेश दे दिया गया है.
आबकारी विभाग की अधिसूचना के अनुसार, 20 से 23 अप्रैल तक चार दिन दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी. इसके बाद 25 अप्रैल की शाम से 29 अप्रैल तक फिर से शराबबंदी लागू रहेगी. साथ ही मतगणना के दिन 4 मई को भी दुकानें बंद रहेंगी.
इस आदेश का सीधा अर्थ यह है कि दूसरे चरण वाले क्षेत्रों में मतदान से लगभग एक सप्ताह पहले ही शराब की बिक्री रोक दी गई है.
हालांकि विभाग ने 1998 के पुराने नियमों का हवाला देते हुए समय सीमा बढ़ाने की बात कही है, लेकिन चुनाव आयोग की जानकारी के बिना लिए गए इस "स्वैच्छिक" फैसले ने राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद को जन्म दे दिया है. बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक हुई इस बंदी से कारोबारियों और आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.