तारों से बिछड़े ग्रहों के चंद्रमाओं पर पनप सकता है जीवन ?
नई दिल्ली । डेस्क: ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों में क्या हम अकेले हैं? यह सवाल सदियों से मानव सभ्यता और विज्ञान को मथता रहा है. अब तक हमारी खोज सूर्य जैसे चमकते सितारों और उनके इर्द-गिर्द घूमने वाले ग्रहों तक सीमित थी, लेकिन जर्मनी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी क्रांतिकारी संभावना पेश की है जो एलियंस और जीवन की हमारी परिभाषा को बदल सकती है.
मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के खगोलशास्त्री डॉ. डालबाडिंग के नेतृत्व में हुए एक शोध के अनुसार, अंतरिक्ष में स्वतंत्र रूप से घूम रहे 'आवारा' या 'खानाबदोश' ग्रहों (Rogue Planets) के चंद्रमाओं पर जीवन के पनपने की प्रबल संभावना है. ये ऐसे ग्रह हैं जो किसी तारे या सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से मुक्त होकर अंतरिक्ष के अंधेरे में अकेले सफर कर रहे हैं.
आमतौर पर माना जाता है कि जीवन के लिए सूर्य की गर्मी और प्रकाश अनिवार्य है, लेकिन जर्मन शोधकर्ताओं ने इस धारणा को चुनौती दी है. उनके अध्ययन से पता चलता है कि इन स्वतंत्र ग्रहों के साथ घूमने वाले चंद्रमाओं पर आंतरिक गर्मी पैदा होती है. यह गर्मी तारे की कमी को पूरा कर सकती है.
शोध के अनुसार, मुख्य ग्रह और उसके चंद्रमा के बीच होने वाली गुरुत्वाकर्षण की खींचतान यानी 'टाइडल हीटिंग' से चंद्रमा के भीतर पर्याप्त ऊष्मा उत्पन्न होती है. इसके साथ ही, यदि इन चंद्रमाओं के पास हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड से समृद्ध एक घना वायुमंडल हो, तो वे इस गर्मी को अंतरिक्ष में खोने के बजाय संरक्षित कर सकते हैं.
यह प्रक्रिया वहां की सतह पर पानी को तरल अवस्था में बनाए रखने के लिए पर्याप्त है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि तरल पानी ही वह बुनियादी तत्व है जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. शोध में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि इन चंद्रमाओं पर लगभग 430 करोड़ वर्षों तक पानी तरल अवस्था में रह सकता है, जो पृथ्वी की वर्तमान आयु के लगभग बराबर है.
इतने लंबे समय में किसी भी खगोलीय पिंड पर जीवन का जन्म, विकास और क्रमिक विकास (Evolution) पूरी तरह संभव है. वैज्ञानिकों ने इन चंद्रमाओं की प्रारंभिक स्थिति और पृथ्वी की आदिम अवस्था के बीच गहरा संबंध पाया है. उनका तर्क है कि उच्च घनत्व वाली हाइड्रोजन और क्षुद्रग्रहों के प्रभाव से वहां वैसी ही रासायनिक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, जैसी अरबों साल पहले हमारी धरती पर हुई थीं.
आंकड़े बताते हैं कि अंतरिक्ष में ऐसे ग्रहों की संख्या अरबों में है. अनुमान है कि प्रत्येक तारे से औसतन 17 से 21 ग्रह अलग होकर स्वतंत्र हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि उनके चंद्रमाओं की संख्या खरबों में हो सकती है.
हालांकि इन अंधेरे और ठंडे ग्रहों को चिन्हित करना कठिन है, लेकिन यह नई खोज उम्मीद जगाती है कि जीवन केवल सौर मंडलों तक सीमित नहीं है. भले ही वहां मनुष्य जैसे बुद्धिमान जीव न हों, लेकिन काई, सूक्ष्मजीव या कीड़े-मकोड़ों जैसी किसी भी रूप में जान मौजूद हो सकती है.
यह शोध भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक नया रास्ता खोलता है, जहाँ अब वैज्ञानिकों की नजर सितारों से दूर भटकते इन अनजान ठिकानों पर भी होगी.