करही गोलीकांड: तीन शूटर दबोचे गए, मास्टरमाइंड की तलाश
जांजगीर । संवाददाता: बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में जांजगीर-चांपा पुलिस को करही सनसनीखेज हत्याकांड में बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. 'ऑपरेशन हंट' के तहत पुलिस टीमों ने देश के सात राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर तीन आरोपियों को दबोच लिया है. पकड़े गए आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल, मैगजीन और मोटरसाइकिल बरामद कर ली गई है.
पुलिस की इस कार्रवाई से मामले में कई चौंकाने वाले मोड़ सामने आए हैं, हालांकि इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार अब भी कानून की गिरफ्त से दूर है.
इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा करते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कत्ल की इस खौफनाक साजिश के पीछे पैसों का लेनदेन, आपसी रंजिश और व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता मुख्य वजह थी.
तकनीकी साक्ष्यों को खंगालने के लिए पुलिस ने करीब 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और साइबर सेल की मदद से आरोपियों तक पहुंचने में सफलता पाई. जांच में एक और सनसनीखेज खुलासा यह भी हुआ है कि साल 2023 में मृतक के पिता की हत्या के लिए भी ₹7 लाख की सुपारी दी गई थी.
गौरतलब है कि बीती 23-24 अप्रैल की मध्यरात्रि को ग्राम करही में अज्ञात नकाबपोश बदमाशों ने घर के भीतर घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी. इस हमले में आयुष कश्यप नामक युवक की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उसका छोटा भाई गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी हो गया था.
इस वारदात के बाद से ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है. पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में विशेष टीमें लगातार फरार चल रहे बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई हैं.
दूसरी ओर, इस कार्रवाई के बाद भी पीड़ित परिवार पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है. मृतक के पिता सम्मेलाल कश्यप का कहना है कि पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ा है, वे सिर्फ मोहरे हैं. असली साजिशकर्ता और इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड अभी भी खुलेआम घूम रहा है.
उन्होंने आशंका जताई है कि जब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक उनके परिवार पर खतरा मंडराता रहेगा. उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द न्याय की गुहार लगाई है.