बस्तर और सरगुजा तक पहुँचे न्याय- CJI सूर्यकांत
रायपुर । संवाददाता: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संस्थागत विरासत को समर्पित एक ई-स्मारिका ‘नर्चरिंग द फ्यूचर ऑफ द जुडिशियरी’ का डिजिटल विमोचन किया. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान सीजेआई ने इस ई-स्मारिका को जारी किया.
इस गरिमामयी अवसर पर उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा के साथ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा भी उपस्थित रहे.
समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता की सराहना की. उन्होंने राज्य के ऐतिहासिक नाम "छत्तीस किलों की भूमि" का संदर्भ देते हुए कहा कि संवैधानिक न्यायालय लोकतंत्र के आधुनिक रक्षक हैं, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं और सत्ता पर संवैधानिक सीमाएं बनाए रखते हैं.
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि न्याय केवल शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसकी पहुंच बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों तक समान रूप से होनी चाहिए.
सीजेआई ने कहा कि न्यायिक अकादमी केवल एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं है, बल्कि एक आधारभूत संस्थान है जो न्यायपालिका की भविष्य की संस्कृति और शक्ति को आकार देता है.
इससे पहले स्वागत भाषण में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्यायिक अकादमी को राज्य में न्यायिक उत्कृष्टता का आधार स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि यह ई-स्मारिका अकादमी के विकास, बुनियादी ढांचे और आधुनिक तकनीक-आधारित प्रशिक्षण की यात्रा को दर्शाती है.
उन्होंने विश्वास जताया कि सीजेआई का मार्गदर्शन राज्य में न्यायिक शिक्षा और सुधारों को नई दिशा प्रदान करेगा. कार्यक्रम में राज्य की भौगोलिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए इस बात पर बल दिया गया कि दूरी या कठिन भूभाग न्याय प्राप्ति में बाधा नहीं बनने चाहिए.