जशपुर: 1500 रुपये में कैसे खिलाएं खाना? छात्रावास अधीक्षकों का 12 नवंबर को सांकेतिक हड़ताल
महंगाई और ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था से जूझ रहे जशपुर के छात्रावास अधीक्षकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 12 नवंबर को एक दिवसीय सांकेतिक आंदोलन का ऐलान किया है. जानिए क्या हैं उनकी मुख्य मांगें.
जशपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आदिवासी एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग अंतर्गत संचालित लगभग 200 छात्रावासों की व्यवस्थाएं जल्द ही ठप पड़ सकती हैं. छात्रावास अधीक्षक संघ ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन के सामने मोर्चा खोल दिया है.
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन स्तर पर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे 12 नवंबर को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे, जिसके बाद मांगें पूरी न होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा.
अधीक्षकों का कहना है कि वर्तमान में प्रति छात्र 1500 रुपये मिलने वाली शिष्यवृत्ति राशि तेजी से बढ़ती महंगाई के दौर में पूरी तरह नाकाफी साबित हो रही है. इसके अलावा, यदि कोई विद्यार्थी 10 दिन से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है तो उसकी शिष्यवृत्ति की राशि काट ली जाती है, जिससे मेस का संचालन और खाद्य सामग्री का प्रबंध करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
संघ ने विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति बढ़ाने अथवा हॉस्टलों के लिए अलग से पूरक बजट प्रदान करने का आग्रह किया है.
बजट की कमी के साथ-साथ ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्य व्यवस्था ने भी अधीक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. व्हीकेएस (VKS) ऐप के माध्यम से रोजाना ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि हॉस्टल प्रबंधन और विद्यार्थियों के शासकीय कार्यों के सिलसिले में अक्सर अधिकारियों को परिसर से बाहर रहना पड़ता है.
समय पर हाजिरी दर्ज न होने पर वेतन कटने का डर हमेशा बना रहता है. इसके अतिरिक्त, सरकारी आयोजनों में छात्रों को लाने-ले जाने और परिवहन का खर्च भी अधीक्षकों को अपनी जेब से वहन करना पड़ता है, जिसका पुनर्भुगतान समय पर नहीं हो पाता.
इस पूरे विवाद पर प्रशासनिक पक्ष रखते हुए आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के सहायक आयुक्त संजय सिंह ने बताया कि संघ द्वारा उठाए गए नीतिगत मुद्दों का समाधान शासन स्तर से ही संभव है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय व विभागीय कार्यों के दौरान अधीक्षकों द्वारा किए गए अतिरिक्त व्यय के बिल विभाग में प्रस्तुत किए जा सकते हैं, जिन्हें बजट उपलब्धता के आधार पर नियमानुसार स्वीकृत कर भुगतान कर दिया जाएगा.