जगदलपुर: पत्रकार सुरक्षा कानून को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग, धरना
जगदलपुर । संवाददाता: बस्तर जिला पत्रकार संघ के नेतृत्व में सोमवार को जगदलपुर में मीडियाकर्मियों ने अपनी सुरक्षा और अधिकारों को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया. इस आंदोलन के बाद पत्रकारों ने रैली निकालकर जिला कलेक्टर आकाश छिकारा को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें छत्तीसगढ़ मीडियाकर्मी सुरक्षा विधेयक 2023 को तत्काल और प्रभावी ढंग से अधिसूचित कर धरातल पर उतारने की मांग की गई है.
बस्तर जैसे संवेदनशील अंचल में काम करने वाले जमीनी पत्रकारों का कहना है कि वे साल 2010 से ही इस तरह के कानूनी संरक्षण की मांग कर रहे हैं, क्योंकि क्षेत्र में काम करते समय उन्हें अक्सर धमकियों, हिंसा और झूठे मुकदमों का सामना करना पड़ता है.
गौरतलब है कि यह महत्वपूर्ण विधेयक वर्ष 2023 में राज्य विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है, लेकिन इसके नियम और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी तरह अधिसूचित न होने के कारण इसके प्रावधान अब तक जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो सके हैं. नियमों के इसी अभाव के चलते पत्रकारों को इस कानून का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है.
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बिना किसी ठोस और निष्पक्ष जांच के मीडियाकर्मियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कर ली जाती है, जिससे उन्हें मानसिक, सामाजिक और कानूनी तौर पर प्रताड़ित होना पड़ता है. पत्रकारों ने मांग की है कि किसी भी कार्रवाई से पहले पूरी जांच प्रक्रिया का पालन किया जाना अनिवार्य हो.
इस प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने रेखांकित किया कि इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य पत्रकारों को हर तरह के उत्पीड़न, दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई और हिंसा से बचाना है. इसके तहत शिकायतों के निवारण और सुरक्षा संबंधी मामलों की निगरानी के लिए एक विशेष समिति गठित करने का भी प्रावधान है, जो नियमों के अटकने की वजह से शुरू नहीं हो सकी है.
संघ के अध्यक्ष मनीष गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव प्रकाश सीजी, वरिष्ठ पत्रकार नरेश मिश्रा, धर्मेंद्र महापात्र और केशव स्रोत सहित बड़ी संख्या में जुटे मीडियाकर्मियों ने जोर देकर कहा कि प्रेस को निर्भीक होकर काम करने का माहौल देना सरकार की जिम्मेदारी है और यह कानून बस्तर के पत्रकारों के लिए एक आवश्यक सुरक्षा कवच साबित होगा. इस पूरे कार्यक्रम का संचालन संघ के कोषाध्यक्ष सुब्बा राव द्वारा किया गया.