क्या सीजफायर की ओर बढ़ रहा है अमेरिका?
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के "नए शासन" ने अमेरिका से सीजफायर यानी युद्धविराम की गुहार लगाई है.
हालांकि, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. तेहरान से रिपोर्ट करते हुए अल जजीरा के पत्रकार अली हाशम ने पुष्टि की है कि ईरान ने ऐसी किसी भी आधिकारिक मांग से इनकार किया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ट्रंप वाशिंगटन डीसी में ईरान पर एक "महत्वपूर्ण अपडेट" देने के लिए राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि उनकी सरकार सीजफायर के अनुरोध पर तभी विचार करेगी जब सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' पूरी तरह से खुल जाएगा और सुरक्षित होगा. उन्होंने आक्रामक तेवर अपनाते हुए यहां तक कह दिया कि तब तक अमेरिका ईरान को "पाषाण युग" (स्टोन एज) में भेजने के लिए बमबारी जारी रखेगा.
गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, जो युद्ध के कारण वर्तमान में बंद है. इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है और दुनिया भर में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बयानों में विरोधाभास है. एक तरफ वे युद्ध जल्द समाप्त होने और तेल की कीमतें कम होने की उम्मीद जता रहे हैं, तो दूसरी तरफ वे ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दे रहे हैं.
दोहा इंस्टीट्यूट फॉर ग्रेजुएट स्टडीज के प्रोफेसर मोहम्मद अलमासरी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल पहले ही ईरान के सैकड़ों स्कूलों, अस्पतालों और रिहायशी इलाकों को निशाना बना चुके हैं.
2,000 पाउंड के भारी-भरकम बमों के इस्तेमाल से भारी नागरिक क्षति हुई है. फिलहाल व्हाइट हाउस के सूत्रों का संकेत है कि ट्रंप युद्ध की समाप्ति के बजाय इसके कुछ और हफ्तों तक जारी रहने की घोषणा कर सकते हैं, जिसे वे "अल्पकालिक पीड़ा" बता रहे हैं. पूरी दुनिया की नजरें अब ट्रंप के अगले संबोधन पर टिकी हैं.