वर्किंग आवर्स ट्रैकिंग में गड़बड़ी: फ्रांस में इंफोसिस पर 1.75 लाख यूरो का जुर्माना
नई दिल्ली । डेस्क: फ्रांस के क्षेत्रीय श्रम प्राधिकरण, DRIEETS इले-डी-फ्रांस ने भारतीय आईटी दिग्गज कंपनी इंफोसिस पर 1,75,000 यूरो (लगभग 1.6 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई कंपनी के कर्मचारी टाइम-ट्रैकिंग सिस्टम में खामियां पाए जाने और स्थानीय श्रम कानूनों का उल्लंघन करने के चलते की गई है.
फ्रांसीसी श्रम प्राधिकरण ने अपने निष्कर्षों में स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के काम के घंटों को दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला इंफोसिस का सिस्टम देश की कानूनी आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा नहीं करता है. नियामक ने इस प्रणाली की विश्वसनीयता, ऑडिटेबिलिटी और कुछ विशिष्ट श्रेणी के कर्मचारियों की निगरानी क्षमताओं में गंभीर कमियां पाई हैं.
फ्रांस में श्रम कानूनों के तहत कंपनियों के लिए कर्मचारियों के काम के घंटे सटीक रूप से ट्रैक और रिकॉर्ड करना अनिवार्य है. नियोक्ताओं को अधिकारियों के सामने काम के घंटों का औचित्य साबित करना होता है, साथ ही कर्मचारियों को अपने समय के रिकॉर्ड तक कभी भी पहुँच की अनुमति देनी होती है.
यूरोपीय संघ के न्यायालय (CJEU) के 2019 के आदेश और फ्रांस के लेबर कोड के अनुसार, नियोक्ताओं के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाना आवश्यक है जो 'वस्तुनिष्ठ, विश्वसनीय और सुलभ' हो तथा प्रत्येक कार्यकर्ता के दैनिक घंटों को सटीक माप सके.
हालांकि, इस नियामक कार्रवाई के बाद इंफोसिस ने एक फाइलिंग में कहा कि इस जुर्माने से उसकी वित्तीय स्थिति, परिचालन या अन्य गतिविधियों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा और कंपनी फिलहाल इस फैसले की समीक्षा करते हुए अपने अगले कदमों पर विचार कर रही है.
फ्रांस में लगे इस जुर्माने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है. यह मामला ऐसे समय में आया है जब इंफोसिस के सह-संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति के "70 घंटे काम करने के सप्ताह" वाले बयान को लेकर विवाद जारी है.
वर्ष 2023 में नारायण मूर्ति ने भारतीय युवाओं से अपील की थी कि देश की उत्पादकता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए उन्हें हफ्ते में 70 घंटे काम करना चाहिए. सोशल मीडिया पर नेटिजन्स अब फ्रांस की इस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं और नारायण मूर्ति के उस बयान पर निशाना साध रहे हैं.
कई यूजर्स का कहना है कि अत्यधिक काम का दबाव कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन के लिए नुकसानदेह है तथा फ्रांस ने यूरोपीय श्रम मानकों की रक्षा करते हुए बिल्कुल सही कदम उठाया है.
फ्रांस में निजी क्षेत्र के पूर्णकालिक कर्मचारियों के लिए वैधानिक कार्य सप्ताह 35 घंटे का तय है. कुछ विशेष भूमिकाओं में इसे 48 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन 35 घंटे के बाद किए गए काम को ओवरटाइम माना जाता है, जिसके लिए कर्मचारियों को 125 प्रतिशत से लेकर 150 प्रतिशत तक का अतिरिक्त भुगतान किया जाता है.
यूरोपीय देशों में कर्मचारियों के अधिकारों और काम के घंटों की सख्त निगरानी की जाती है. ऐसे में इंफोसिस पर हुई यह कार्रवाई न केवल आईटी उद्योग में कार्य संस्कृति और श्रम कानूनों के अनुपालन के महत्व को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि वैश्विक कंपनियों को विदेशी धरती पर काम करते समय स्थानीय श्रम मानकों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है.