भारतीय चाय के सबसे बड़े खरीदार इराक और चीन, निर्यात बढ़ा
नई दिल्ली । डेस्क: भारत के चाय निर्यात ने वर्ष 2025 में एक नया इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड ऊंचाई को छू लिया है. वैश्विक स्तर पर अस्थिर भू-राजनीतिक व्यापारिक माहौल के बावजूद, इराक और चीन को होने वाली शिपमेंट में भारी उछाल के कारण भारतीय चाय की मांग में जबरदस्त मजबूती देखी गई.
टी बोर्ड ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष चाय का निर्यात 9.5 प्रतिशत बढ़कर 280.4 मिलियन किलोग्राम (mkg) तक पहुंच गया, जो कि 2024 में 256.17 मिलियन किलोग्राम था.
इराक भारतीय चाय के सबसे बड़े गंतव्य के रूप में उभरा है, जिसने कुल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा हासिल किया है. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दूसरे स्थान पर रहा, जहाँ से चाय के अन्य क्षेत्रों, विशेषकर ईरान को भेजे जाने की संभावना जताई गई है.
एक बड़ी सफलता चीन के बाजार में मिली है, जहाँ भारतीय चाय का निर्यात 2024 के 6.24 mkg से दोगुने से भी अधिक बढ़कर 16.13 mkg हो गया है. चीन मुख्य रूप से ग्रीन टी उत्पादक है, लेकिन वहां भारतीय ब्लैक टी (ऑर्थोडॉक्स टी) की मांग तेजी से बढ़ रही है.
अमेरिकी बाजार में भी भारतीय चाय के लिए स्थिति सुधरी है. अगस्त 2025 में लगाए गए 50 प्रतिशत के टैरिफ के कारण निर्यात लगभग रुक गया था, लेकिन नवंबर में ट्रम्प प्रशासन द्वारा इन शुल्कों को हटाए जाने के बाद अब भारतीय चाय पर शून्य टैरिफ लग रहा है.
वर्ष 2026 के लिए उद्योग ने 300 mkg निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. हालांकि, निर्यातकों ने यूरोपीय संघ द्वारा कीटनाशकों से संबंधित नए और कड़े खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता जताई है.
जानकारों का मानना है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए ऑर्गेनिक उत्पादन और सरकारी सहयोग की आवश्यकता होगी ताकि मोरक्को, अल्जीरिया और अफगानिस्तान जैसे नए बाजारों में भारतीय चाय अपनी पकड़ मजबूत कर सके.