पाकिस्तान की मध्यस्थता को ईरान ने किया खारिज
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्धविराम कराने के लिए पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता प्रयासों को सिरे से खारिज कर दिया है. ईरानी सरकार ने न केवल इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के लिए अपने अधिकारियों को भेजने से इनकार कर दिया, बल्कि वाशिंगटन की शर्तों को भी पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है.
'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान में होने वाली चर्चाओं के ढांचे पर गंभीर चिंता जताई है.
वर्तमान में तुर्की और मिस्र वैकल्पिक स्थानों के रूप में कतर और इस्तांबुल पर विचार कर रहे हैं ताकि कूटनीतिक गतिरोध को तोड़ा जा सके.
गौरतलब है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के राजनयिकों के साथ संकट पर चर्चा की थी, लेकिन तेहरान ने इसमें शामिल होने से मना करते हुए कहा कि उसकी एकमात्र प्राथमिकता अमेरिकी और इजरायली हमलों के खिलाफ अपनी रक्षा करना है.
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कड़े तेवर दिखाए हैं.
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान युद्धविराम चाहता है, लेकिन अमेरिका ऐसी किसी भी संभावना पर तभी विचार करेगा जब ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से अपना नियंत्रण पूरी तरह हटा लेगा.
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए लिखा, "जब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला और मुक्त नहीं हो जाता, तब तक हम ईरान पर इस कदर बमबारी करेंगे कि उसे विनाश के कगार पर या 'पत्थर युग' में पहुंचा दिया जाएगा." हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इन दावों को 'झूठा और निराधार' करार दिया है.
खुफिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जल्द ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य से अपना नियंत्रण नहीं हटाएगा, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति के इस सबसे महत्वपूर्ण मार्ग पर उसकी पकड़ ही अमेरिका के खिलाफ उसका सबसे बड़ा हथियार है.
'रॉयटर्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस रणनीतिक रास्ते को बंद रखकर ऊर्जा की कीमतों को ऊंचा बनाए रखना चाहता है ताकि राष्ट्रपति ट्रंप पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बनाया जा सके.
जानकारों का कहना है कि ईरान के परमाणु और सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के अमेरिकी अभियान का उल्टा असर भी हो सकता है, जिससे तेहरान इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर सकता है.