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ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की छूट दी

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के बीच ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर को हॉर्मुज की खाड़ी में बड़ी राहत दी है. इन चार देशों के जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने की अनुमति मिलेगी.

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07 नव. 2026, 01:24 AM 3 मिनट में पढ़ें 74

हॉर्मुज जलडमरूमध्य
हॉर्मुज जलडमरूमध्य

नई दिल्ली । डेस्क: अल ज़जीरा की खबर है कि अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है. ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी पाबंदियों से मुक्त कर दिया है. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मुकद्दम ने पुष्टि की है कि इन चारों देशों के जहाज बिना किसी रुकावट के इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से आ-जा सकते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी बल भी इन जहाजों को बीच में नहीं रोक रहे हैं.

जहाजों की आवाजाही के बदले ईरान को क्या मिलेगा?

इस छूट के बदले ईरान को अपनी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय समर्थन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. अमीर हयात मुकद्दम के अनुसार, भारत से ईरान को जरूरी दवाएं हासिल होंगी, जबकि चीन उसे राजनीतिक समर्थन मुहैया कराएगा. वहीं कतर, जो अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की अगुवाई कर रहा है, ईरान को कूटनीतिक सहयोग देगा.

अल ज़जीरा की खबरों के अनुसार वित्तीय मोर्चे पर, ईरान भारत और चीन के जहाजों से ट्रांजिट शुल्क (गुजरने का शुल्क) वसूलेगा, जबकि कतरी जहाजों को मुफ्त में गुजरने की अनुमति दी गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा ईरान इस तरह के वस्तु विनिमय और ट्रांजिट शुल्क के माध्यम से अपनी जरूरतों को पूरा करने और राजस्व हासिल करने की कोशिश में जुटा है.

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चारों देशों के लिए क्यों खास है यह समुद्री मार्ग?

खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल और गैस के निर्यात के लिए यह चारों देश पूरी तरह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं. अक्टूबर में इस मार्ग से गुजरने वाले रोजाना 10.23 मिलियन बैरल कच्चे तेल में से 42 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन और 13 प्रतिशत हिस्सा भारत गया था. भारत के लिए खाड़ी से तेल की आपूर्ति रुकना भारी नुकसान था, और बदले में भारत उन दवाओं का बड़ा निर्माता है जिन्हें ईरान खुद नहीं बना सकता. दूसरी ओर, कतर एलएनजी (LNG) का बड़ा निर्यातक है और उसकी सीमाएं ईरान से लगती हैं, जिससे दोनों के संबंध बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं.

अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और सुरक्षा की चुनौती

ईरान का यह कदम अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के लिए चुनौती पैदा कर सकता है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि उनकी नाकाबंदी केवल ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर लागू होती है, जबकि मानवीय सहायता वाले जहाजों को जांच के बाद जाने दिया जाता है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिकी प्रशासन ईरान के इस कदम को स्वीकार कर लेता है, तो अमेरिकी नाकाबंदी का प्रभाव काफी कमजोर हो सकता है.

हालांकि, ईरान द्वारा छूट दिए जाने के बावजूद इस क्षेत्र में जहाजों के लिए खतरा पूरी तरह टला नहीं है. 30 अक्टूबर को कतर के एक एलएनजी टैंकर पर अज्ञात वस्तुओं से हमला हुआ था. युद्ध की शुरुआत के बाद से इस क्षेत्र में 120 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है, जिसमें अक्टूबर का महीना सबसे ज्यादा प्रभावित रहा. 

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजारों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते और हॉर्मुज के जलमार्ग को पूरी तरह खोलने की शर्तों पर टिकी हुई है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP