ईरान और अमेरिका के बीच 'सैद्धांतिक सहमति', सैन्य तनाव बरकरार
जिनेवा । डेस्क: जिनेवा में आयोजित ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने मंगलवार को घोषणा की कि दोनों देश मार्गदर्शन करने वाले सिद्धांतों के एक समूह पर व्यापक सहमति बनाने में सफल रहे हैं.
हालांकि, एक तरफ जहां राजनयिक स्तर पर "अच्छी प्रगति" का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर फारस की खाड़ी में बढ़ती सैन्य लामबंदी और वॉशिंगटन की ओर से दी गई 'सैन्य विकल्प' की चेतावनी ने क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ा दी है.
ओमान की मध्यस्थता में हुई इस बैठक के बाद अरागची ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि पिछले दौर की तुलना में इस बार बातचीत का रास्ता अधिक स्पष्ट है. उन्होंने संकेत दिया कि अब दोनों पक्ष समझौते के मसौदे पर काम शुरू करेंगे, जिसे बाद में साझा किया जाएगा.
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दशकों पुराने मतभेदों को पाटने में अभी समय लगेगा. दूसरी तरफ, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रगति पर मिला-जुला रुख अपनाया.
वेंस ने एक साक्षात्कार में कहा कि हालांकि बातचीत का जारी रहना सकारात्मक है, लेकिन ईरान अभी भी राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित उन 'रेड लाइन्स' को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, जो परमाणु और गैर-परमाणु दोनों मुद्दों से जुड़ी हैं.
इस कूटनीतिक हलचल के बीच खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. अमेरिका ने क्षेत्र में दो विमानवाहक पोत तैनात किए हैं, जिनमें से एक, यूएसएस अब्राहम लिंकन, ईरानी तट से महज 700 किलोमीटर की दूरी पर है.
इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास अमेरिकी युद्धपोतों को डुबोने की क्षमता है. साथ ही, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध अभ्यास शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. ई
रान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस जलमार्ग के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद भी किया है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका बढ़ गई है.
वार्ता की मेज पर मुख्य पेंच यूरेनियम संवर्धन और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर फंसा है. ईरान चाहता है कि किसी भी समझौते से उसे ठोस आर्थिक लाभ मिले और उसके संवर्धन के अधिकार को मान्यता दी जाए. इसके विपरीत, अमेरिका की मांग है कि ईरान अपने क्षेत्र में यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे और अपनी मिसाइल क्षमताओं पर भी चर्चा करे.
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी मिसाइल ताकत "नॉन-नेगोशिएबल" यानी चर्चा के दायरे से बाहर है.
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध में ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान के कारण, अब ईरान के लिए कुछ तकनीकी रियायतें देना आसान हो सकता है, लेकिन क्षेत्रीय प्रभाव और मिसाइल कार्यक्रमों पर वह किसी भी तरह के "आत्मसमर्पण" के मूड में नहीं है.
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने एक बार फिर दोहराया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता और वह सत्यापन के लिए तैयार है, लेकिन विज्ञान और उद्योग के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग उसका अधिकार है.