भारत-चीन संबंधों में सुधार की उम्मीद
भारत-चीन संबंधों में सुधार, पाकिस्तान की नींद उड़ी
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और चीन अगले महीने से सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने की तैयारी में हैं. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में मंगलवार को यह जानकारी दी गई. यह कदम दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार का संकेत माना जा रहा है.
2020 में लद्दाख की गालवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया था.
यह दशकों में सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था, जिसके कारण द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट आई. दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य तैनाती बढ़ाई और कई सैन्य व कूटनीतिक वार्ताएं हुईं. हालाँकि, कुछ क्षेत्रों में स्थिति सुधरी, लेकिन कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं.
पिछले साल लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों से दोनों पक्षों ने सैनिकों को वापस बुलाया, जो एक बड़ा कदम था. 30 अक्टूबर को सैनिकों, तंबुओं और अस्थायी ढांचों को हटाने की प्रक्रिया पूरी हुई.
इस संघर्ष का असर व्यापार और जनसंपर्क पर भी पड़ा. भारत ने चीनी निवेश पर प्रतिबंध लगाए, आयात पर सख्त निगरानी की, और महामारी के दौरान सीधी उड़ानें बंद रहीं.
हाल के महीनों में तनाव कम करने के संकेत मिले हैं, और नियमित बातचीत से स्थिति सामान्य करने की कोशिश जारी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के लिए चीन के तियानजिन जाएंगे.
यह 2019 के बाद उनकी पहली चीन यात्रा होगी. चीन ने इस दौरे का स्वागत किया है और इसे “एकता, मित्रता और उत्पादकता का मंच” बताया है.
इस यात्रा से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित कई भारतीय प्रतिनिधिमंडल SCO से संबंधित बैठकों के लिए चीन गए हैं.
यदि भारत और चीन के बीच संबंध सुधरते हैं, तो सबसे अधिक दबाव पाकिस्तान पर पड़ेगा.
पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ काम किया है. यदि भारत-चीन संबंध बेहतर होते हैं, तो पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ना तय है.