USTR में बढ़ी बाघों के पुनरुद्धार की उम्मीद
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में इस साल की शुरुआत में आई एक चार वर्षीय बाघिन ने वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधिकारियों में उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है. पिछले तीन दशकों से बाघों की घटती संख्या से जूझ रहे इस रिजर्व के लिए यह बाघिन एक वरदान साबित हो सकती है.
सबसे खास बात यह है कि इस बाघिन ने पानी और शिकार की भारी किल्लत वाले भीषण गर्मी के महीनों को भी इसी रिजर्व में बिताया है, जिससे अधिकारी यह मान रहे हैं कि यह आवास अब एक बार फिर बाघों की आबादी को बढ़ाने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए अनुकूल हो चुका है.
वन अधिकारियों ने बताया कि इस बाघिन की धारियों का मिलान भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के आधिकारिक डेटाबेस से नहीं हुआ है, जिसके कारण इसका नाम 'पहेली' रखा गया है. पहेली ने न केवल यहां के कड़े मौसम का सामना किया, बल्कि हाथियों के झुंड के साथ भी अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी दर्ज कराई है.
उसकी सुरक्षा और निगरानी के लिए वन विभाग नियमित गश्त, कैमरा ट्रैपिंग और थर्मल ड्रोन का उपयोग कर रहा है. सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए उसे जल्द ही रेडियो-कॉलर पहनाने की योजना है, ताकि यदि वह पड़ोसी राज्य ओडिशा या अन्य क्षेत्रों में जाए, तो उसकी सटीक लोकेशन मिल सके.
उदंती-सीतानदी का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. साल 1998 में यहाँ 18 बाघ थे, जो 2006 तक सिमटकर महज 3 रह गए. साल 2009 में उदंती और सीतानदी अभ्यारण्यों को मिलाकर इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया, लेकिन साल 2023 तक यह केवल एक ट्रांजिट रूट बनकर रह गया और कोई भी स्थानीय बाघ यहाँ नहीं बचा. बाघों के साथ-साथ यहाँ राज्य पशु वन भैंसों की संख्या भी 80 से घटकर अब सिर्फ एक रह गई है.
इस निराशाजनक स्थिति को बदलने के लिए प्रशासन अब युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से मध्य प्रदेश से 3 बाघों (एक नर और दो मादा) को लाने की मंजूरी मिल चुकी है. इसके लिए 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में घास के मैदान विकसित किए जा रहे हैं और नए जलाशय बनाए जा रहे हैं ताकि शिकार और पानी की उपलब्धता बढ़ सके.
इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में 956 हेक्टेयर से अधिक अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराया गया है और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के सहयोग से 15 अंतर-राज्यीय अभियानों में 100 से अधिक शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है. बाघों के साथ ही असम से 3 मादा वन भैंसों को भी लाया गया है, जिन्हें जल्द ही रिजर्व में छोड़ा जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ के इस जंग लगे पारिस्थितिकी तंत्र को एक नया जीवन मिलने की उम्मीद है. Symbolic Photo.