ध्वनि तरंगों से होगा लिवर कैंसर का खात्मा: नई खोज
नई दिल्ली । डेस्क: वैज्ञानिकों ने लिवर कैंसर के इलाज में एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है, जिसमें ध्वनि तरंगों (अल्ट्रासाउंड वेव्स) का उपयोग कर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है. इस तकनीक को हिस्टोट्रिप्सी कहा जाता है, जो बिना सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी के दर्दनाक और समय लेने वाले तरीकों के विकल्प के रूप में उभर रही है. यह तकनीक न केवल कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है, बल्कि आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती.
अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 2021 से इस तकनीक पर शोध और क्लिनिकल ट्रायल शुरू किए थे. खबरों के अनुसार, इस पद्धति का मानव शरीर पर भी प्रयोग किया गया है. 2023 में अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इस चिकित्सा पद्धति को मंजूरी दे दी.
हिस्टोट्रिप्सी: ध्वनि तरंगों की ताकत
हिस्टोट्रिप्सी में एक विशेष उपकरण का उपयोग किया जाता है, जो उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है. ये तरंगें इतनी तीव्र होती हैं कि वे ट्यूमर कोशिकाओं को चकनाचूर कर देती हैं. यदि कैंसर कोशिकाओं का विभाजन तेजी से हो रहा हो, तो ये तरंगें उन्हें संकुचित कर नष्ट कर देती हैं. शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का पहला परीक्षण चूहों पर किया, जिसमें लिवर कैंसर से प्रभावित चूहों पर ध्वनि तरंगों का उपयोग कर 50 से 70 प्रतिशत कैंसर कोशिकाएं पहली बार में ही नष्ट हो गईं, जबकि स्वस्थ कोशिकाएं सुरक्षित रहीं.
त्रिआयामी इमेजिंग के साथ सटीक निशाना
हिस्टोट्रिप्सी उपकरण में त्रिआयामी (3D) इमेजिंग की क्षमता भी है. जैसे गर्भवती महिलाओं में भ्रूण की स्थिति देखने के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग होता है, वैसे ही इस उपकरण से शरीर के अंदर कैंसर के फैलाव का सटीक त्रिआयामी चित्र प्राप्त किया जा सकता है. इसके बाद, ठीक उन स्थानों को निशाना बनाकर शब्द तरंगों का प्रहार किया जाता है, जो सैकड़ों कैंसर कोशिकाओं को एक झटके में नष्ट कर देता है.
पारंपरिक उपचारों से बेहतर
कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचता है, जिसके दुष्प्रभाव रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देते हैं. इससे अन्य बीमारियां उभरने का खतरा रहता है. लेकिन हिस्टोट्रिप्सी को शोधकर्ताओं ने अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बताया है.
वर्तमान में मानव शरीर पर इस तकनीक का प्रयोगात्मक अनुप्रयोग चल रहा है. शोधकर्ता यह जांच कर रहे हैं कि क्या हिस्टोट्रिप्सी को सभी कैंसर रोगियों के लिए व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है.