'द केरल स्टोरी 2' पर हाई कोर्ट सख्त: फैसले से पहले खुद फिल्म देखेंगे जज
नई दिल्ली । डेस्क: फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' अब कानूनी विवादों के केंद्र में आ गई है. जहाँ केरल हाई कोर्ट ने फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह फिल्म की सामग्री को समझे बिना याचिकाओं को खारिज नहीं कर सकता, इसलिए जजों ने फिल्म की 'स्पेशल स्क्रीनिंग' देखने की योजना बनाई है.
जस्टिस बेचु कुरियन थॉमस की पीठ ने केंद्र सरकार से आज ही यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या अदालत के लिए फिल्म के प्रदर्शन की व्यवस्था की जा सकती है. अदालत का मानना है कि फिल्म के दृश्यों और संवादों को देखने के बाद ही इसके सामाजिक प्रभाव और सेंसर बोर्ड की भूमिका पर कोई सटीक राय बनाई जा सकती है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि केरल एक ऐसा राज्य है जहाँ लोग पूर्ण सद्भाव के साथ रहते हैं, लेकिन फिल्म का चित्रण एक अलग और संभवतः गलत संकेत दे सकता है, जिससे सांप्रदायिक तनाव या वैमनस्य पैदा होने की आशंका है.
अदालत ने विशेष रूप से फिल्म के शीर्षक में 'केरल' शब्द के इस्तेमाल और "सच्ची घटनाओं से प्रेरित" होने के दावे पर सवाल उठाए.
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि फिल्म के नाम से पूरे राज्य की छवि खराब हो रही है और यह वैश्विक स्तर पर मलयाली समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह पैदा कर रहा है.
वहीं, निर्माताओं ने दलील दी कि सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलना ही फिल्म की वैधता का प्रमाण है, हालांकि कोर्ट ने कहा कि यह प्रमाण अंतिम नहीं है और यदि सामग्री भड़काऊ पाई जाती है तो इसकी समीक्षा की जा सकती है. अब सबकी नजरें कोर्ट की स्क्रीनिंग और उसके बाद आने वाले फैसले पर टिकी हैं.