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महिला आरक्षण पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक

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30 अप्रै. 2026, 04:50 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

छत्तीसगढ़ विधानसभा
छत्तीसगढ़ विधानसभा

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में औपचारिक प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद सदन में बहस छिड़ गई. 


जहां दोनों पक्षों ने आरक्षण का सैद्धांतिक समर्थन किया, वहीं इसके लागू होने की समयसीमा और परिसीमन की शर्त को लेकर गहरे मतभेद उभरकर सामने आए.

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भाजपा की ओर से पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक कटाक्ष करते हुए कहा कि 1952 से अब तक महिला सांसदों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण इंदिरा गांधी सरकार के समय 1971 में परिसीमन को फ्रीज करना था. 


उन्होंने छत्तीसगढ़ के स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण को 'नारी शक्ति' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया. 


दूसरी ओर, कांग्रेस ने आरक्षण का समर्थन तो किया लेकिन इसे 'चुनावी झुनझुना' करार दिया. 


पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने तीखा सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है, तो जनगणना और परिसीमन का इंतजार किए बिना इसे वर्तमान ढांचे में ही तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा रहा है? 


कांग्रेस ने इसे जनता के साथ विश्वासघात बताते हुए भाजपा पर आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया. दिन भर चली इस बहस में दोनों ओर के वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक जारी रही.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP