रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

HC : रेप पीड़िता के गर्भपात पर मेडिकल बोर्ड से मांगी रिपोर्ट

C

CG Khabar

13 जून 2026, 01:03 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोरबा जिला अस्पताल के मेडिकल बोर्ड को पीड़िता की स्वास्थ्य जांच करने का निर्देश दिया है. पीड़िता ने लगभग 15 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने (गर्भपात) की अनुमति मांगते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने 'एक्स वाई जेड बनाम छत्तीसगढ़ राज्य' नामक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया और मेडिकल बोर्ड को आगामी 15 जून से पहले अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है.


अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसे उप महाधिवक्ता आनंद दादरिया ने स्वीकार किया. कोर्ट ने पीड़िता को प्रक्रिया शुल्क (प्रोसेस फी) के भुगतान से छूट दी है. 

विज्ञापन

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, याचिकाकर्ता एक बलात्कार पीड़िता है, जिससे संबंधित अपराध का मामला साल 2025 में कोरबा जिले के बांकीमोंगरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था. 


जब पुलिस ने पीड़िता को बरामद किया था, तब वह करीब 12 सप्ताह की गर्भवती थी और वर्तमान में यह अवधि बढ़कर लगभग 15 सप्ताह हो चुकी है. याचिका में उल्लेख किया गया है कि पीड़िता ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है और उसने अपनी मर्जी से गर्भपात कराने की सहमति दी है.


उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट, 1971 (संशोधित 2021) की धारा 3 के तहत गठित एक विशेष मेडिकल बोर्ड द्वारा पीड़िता का परीक्षण किया जाए. इस बोर्ड में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट), बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) और रेडियोलॉजिस्ट या सोनोलॉजिस्ट का होना अनिवार्य किया गया है. 


इसके साथ ही बोर्ड को संबंधित एफआईआर (FIR) के आधार पर पीड़िता की पहचान सत्यापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं.


अदालत ने पीड़िता को 12 जून 2026 की दोपहर 2:00 बजे तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी या मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया था. 


बोर्ड को पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति, गर्भ के चरण, भ्रूण की समग्र स्थिति और इस बात की गहन जांच करनी है कि क्या गर्भपात करना पीड़िता के लिए हानिकारक होगा या फिर गर्भ को पूरा समय देना उसकी जान के लिए जोखिम भरा हो सकता है. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी चिकित्सा जांच का खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP