क्या टूट गया अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम ?
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई हफ्तों से शांति समझौते की उम्मीदें जताई जा रही थीं, लेकिन अब हालात बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ अपने बयानों को बेहद कड़ा कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि राजनयिक समाधान का समय अब समाप्त हो चुका है.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के ऊपर एक हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद, अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर कई ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि वे इन हमलों को जारी रख सकते हैं.
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका ईरान पर बहुत कड़ा प्रहार करने जा रहा है. ट्रंप का मानना है कि ईरान को समझौता करने और खुद को सुरक्षित रखने का मौका दिया गया था, लेकिन उसने बातचीत को केवल खींचने का काम किया.
इस बीच, ईरान ने भी अमेरिकी हमलों का आक्रामक जवाब दिया है. तेहरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित उन सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं, जहां अमेरिकी सेना तैनात है.
हालांकि पिछले कुछ हफ्तों से दोनों देशों के बीच जारी यह सैन्य टकराव सीमित दायरे में था, लेकिन ट्रंप के ताजा बयानों ने चिंता बढ़ा दी है कि 8 अप्रैल को हुआ संघर्षविराम अब पूरी तरह से बेअसर हो चुका है.
ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचों को बम से उड़ाने की अपनी धमकी को फिर से दोहराया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है. इसके बावजूद, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि ईरान सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित हो चुका है और अब उसे देर करने की कीमत चुकानी होगी.
दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा जो उसके राष्ट्रीय अधिकारों का सम्मान नहीं करता. ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर हाजी बाबाई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दृढ़ता दिखाते हुए कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन वह अपनी संप्रभुता और सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगा.
जमीनी हकीकत यह है कि तमाम दावों के बावजूद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अपनी नाकाबंदी बरकरार रखी है, जिससे वैश्विक बाजार में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं.
अमेरिका के भीतर भी ट्रंप को इस मुद्दे पर विपक्ष की कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है. डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फ़ी ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति ने युद्ध पर से नियंत्रण खो दिया है, जबकि देश की जनता बढ़ती महंगाई से त्रस्त है.
इसके अलावा, आगामी फीफा विश्व कप की मेजबानी, अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के जश्न और नवंबर के मध्यावधि चुनावों की तैयारियों के बीच ट्रंप के लिए इस मोर्चे को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है.