HC ने GST घोटाले के आरोपी की जमानत खारिज की
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बड़े पैमाने पर जीएसटी घोटाले में शामिल 21 साल के अनुश कुमार गंगवानी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता और पूरे देश में फैले फर्जीवाड़े को देखते हुए यह फैसला सुनाया. कोर्ट का कहना है कि आरोपी के रिहा होने से जांच प्रभावित हो सकती है.
अनुश को 30 सितंबर, 2023 को गिरफ्तार किया गया था. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) के मुताबिक, उसने रायपुर में एक ही पते से चार फर्जी कंपनियां - नरेश ट्रेडर्स, श्री बालाजी एंटरप्राइजेज, गुरुनानक सेल्स और गणपति ट्रांसपोर्ट एंड ट्रेडिंग - चलाकर फर्जी बिल बनाए. इनके जरिए बिना माल सप्लाई के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का फायदा उठाया गया. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस का दावा है कि इस घोटाले से सरकारी खजाने को 5.53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
जांच की शुरुआत राधे कंस्ट्रक्शन नाम की एक कंपनी से मिली जानकारी के आधार पर हुई, जो फर्जी क्रेडिट पास कर रही थी. जांच का दायरा बढ़ने पर गणपति ट्रांसपोर्ट एंड ट्रेडिंग और फिर अनुश तक पहुंचा. तलाशी के दौरान पता चला कि एक ही पते से कई फर्जी जीएसटी नंबरों का इस्तेमाल हो रहा था.
अनुश के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि चूंकि शिकायत दर्ज हो चुकी है और शुरुआती जांच पूरी हो गई है, इसलिए अब हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रत्नंबर कौशिक बनाम भारत सरकार मामले का हवाला भी दिया. लेकिन केंद्र सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह घोटाला देशव्यापी साजिश का हिस्सा है और जांच अभी पूरी नहीं हुई है. सरकार को डर है कि जमानत मिलने पर आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकता है.
जज पार्थ प्रतीम साहू ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है. आरोपी ने सुनियोजित तरीके से फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निम्मगदा प्रसाद बनाम सीबीआई और संदीप गोयल बनाम भारत सरकार के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक अपराधों में जमानत के लिए सख्त रुख अपनाना जरूरी है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत को यांत्रिक रूप से खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन अपराध की गंभीरता, गवाहों को डराने का खतरा और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जैसे पहलुओं पर विचार करना जरूरी है.
इसलिए, कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया और जांच एजेंसी को जल्द से जल्द जांच पूरी करने का निर्देश दिया.