सरकार को आलोचना सुनकर कमियों को सुधारना चाहिए: मोंटेक सिंह
नई दिल्ली । डेस्क: योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को लेकर एक संतुलित और महत्वपूर्ण दृष्टिकोण सामने रखा है. उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि उसे आर्थिक मोर्चे पर मिल रही आलोचनाओं को ध्यान से सुनना चाहिए और उन समस्याओं को स्वीकार करना चाहिए जिनमें सुधार की जरूरत है.
हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आलोचक हमेशा वाजिब नहीं होते हैं और कुछ लोग राजनीतिक रूप से प्रेरित होकर अत्यधिक प्रतिक्रिया भी देते हैं. एक प्रमुख समाचार चैनल से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सरकार समस्याओं को सुनने के लिए तैयार नहीं होगी, तो वह नीतियों में सुधार करने के बेहतरीन अवसर खो देगी.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे रुपये में गिरावट आई है और देश के राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ा है. सुरजीत भल्ला और अरविंद सुब्रमण्यम जैसे देश के कई जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने भी चेतावनी दी है कि भारत को अपनी आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए बड़े सुधारों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को तेजी से आकर्षित करने की आवश्यकता है.
सुरजीत भल्ला ने देश में गहरे निवेश संकट की बात करते हुए सरकार को तत्काल रुख बदलने की सलाह दी थी. हालांकि, इसके ठीक उलट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में आश्वस्त किया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत है और देश में किसी भी तरह के डर का माहौल बनाने की आवश्यकता नहीं है.
इस विरोधाभास पर मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि वह माहौल बिगाड़ने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन राजनीति में अलग-अलग विचार होना स्वाभाविक है. विपक्ष का काम हमेशा कमियों को उजागर करना होता है, जबकि सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह एक सुसंगत आर्थिक विमर्श पेश करे और बताए कि अर्थव्यवस्था मजबूत क्यों है.
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रधानमंत्री ने खुद विदेशी दौरे से लौटने के बाद मंत्रालयों के साथ बैठक की थी और आर्थिक सुधारों की गति तेज करने के निर्देश दिए थे, जिससे साफ है कि सरकार भी बदलाव की जरूरत को समझती है.
अहलूवालिया ने स्पष्ट किया कि अर्थव्यवस्था में सुस्त निजी निवेश और कमजोर निर्यात जैसी ढांचागत समस्याएं कोई नई नहीं हैं, बल्कि यह कच्चे तेल के मौजूदा संकट से काफी पहले से बनी हुई हैं. 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इन पुरानी समस्याओं को ठीक करना बेहद जरूरी है.
वर्तमान में वैश्विक अनिश्चितता के कारण दुनिया भर के निवेशकों में घबराहट का माहौल है और वे समझ नहीं पा रहे हैं कि अपना पैसा कहां लगाएं. ऐसे समय में भारत सरकार को अपनी प्रमुख आर्थिक नीतियों और सुधारों के एजेंडे को पूरी स्पष्टता के साथ दुनिया के सामने रखना चाहिए ताकि वैश्विक निवेशकों को एक मजबूत और साफ संदेश मिल सके.