सरकार का अगला लक्ष्य बस्तर को IED मुक्त करना
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो दशकों तक लाल आतंक और हिंसा की पहचान बना रहा, अब शांति और स्थिरता की एक नई इबारत लिख रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बस्तर का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा नक्सलवाद के प्रभाव से पूरी तरह उबर चुका है. इस सफलता के बाद प्रशासन और सुरक्षा बलों ने अब अपना पूरा ध्यान क्षेत्र को 'आईईडी (IED) मुक्त' बनाने पर केंद्रित कर दिया है.
अधिकारियों का मानना है कि यद्यपि नक्सली संगठन संख्यात्मक रूप से अब अपने सबसे कमजोर दौर में हैं, लेकिन उनके द्वारा जंगलों में बिछाए गए बारूदी सुरंग और आईईडी (विस्फोटक) अभी भी सुरक्षा बलों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए एक गंभीर चुनौती बने हुए हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 4580 से अधिक विस्फोटकों को बरामद कर निष्क्रिय किया जा चुका है, लेकिन घने जंगलों में छिपे बाकी आईईडी को ढूंढना सरकार की अगली बड़ी प्राथमिकता है. आगामी 30 मार्च को लोकसभा में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा में बस्तर को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की इसी भविष्यगामी रणनीति पर मुहर लग सकती है.
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बस्तर में नक्सलवाद का ग्राफ गिरना महज एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव है. पिछले दो सालों में करीब 5000 नक्सलियों का नेटवर्क ध्वस्त हुआ है, जिनमें आत्मसमर्पण करने वाले और गिरफ्तार किए गए लड़ाके शामिल हैं.
दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में अब नक्सलियों की संख्या इकाई के अंकों में सिमट कर रह गई है.