16 करोड़ लोग नहीं करा पाते जरूरी सर्जरी
16 Cr लोग नहीं करा पाते जरूरी सर्जरी
नई दिल्ली । डेस्क: एक नये वैश्विक शोध में खुलासा हुआ है कि दुनिया भर में हर साल करीब 16 करोड़ लोग ऐसी सर्जरी से वंचित रह जाते हैं, जो उनकी जान बचा सकती है. यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय जर्नल लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आई है. खास तौर पर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सर्जरी तक पहुंच की कमी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है.
अध्ययन के अनुसार, उन बीमारियों का इलाज संभव होने के बावजूद, संसाधनों की कमी, अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधायें और प्राथमिकता न दिये जाने के कारण लाखों लोग असमय मृत्यु का शिकार हो रहे हैं. शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि सस्ती और सुरक्षित सर्जरी तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने का वैश्विक लक्ष्य अब तक हासिल नहीं हो सका है.
20 देशों के 60 स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक गठबंधन ने इस संकट को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है. अध्ययन बताता है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में से केवल 26 फीसदी देश ही 2 घंटे के भीतर जरूरी सर्जरी उपलब्ध कराने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं. इसके अलावा, कोई भी देश प्रति लाख लोगों पर 5,000 सर्जरी के मानक को पूरा नहीं कर पाया है.
सर्जरी के बाद जटिलतायें और मौतें
रिपोर्ट में सर्जरी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई गई है. हर साल लगभग 35 लाख वयस्क सर्जरी के 30 दिनों के भीतर दम तोड़ देते हैं, जो एड्स, तपेदिक और मलेरिया से होने वाली कुल मौतों (20 लाख) से कहीं अधिक है. इसके साथ ही, करीब 5 करोड़ मरीज सर्जरी के बाद जटिलताओं से जूझते हैं, जिनमें घाव का संक्रमण सबसे आम है.
निम्न और मध्यम आय वाले देशों में 96 फीसदी मामलों में घाव के संक्रमण एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते हैं, जिससे इलाज और भी जटिल हो जाता है. शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि सर्जरी के दौरान और बाद में एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ रहा है, जो एक नई वैश्विक चुनौती बन रही है.
अध्ययन से जुड़े प्रोफेसर अनील भांघु ने कहा, "सर्जरी कोई ऐच्छिक सेवा नहीं है, बल्कि यह एक आवश्यक और किफायती स्वास्थ्य सुविधा है, जो किसी भी मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली का आधार है. यदि इस क्षेत्र में तुरंत निवेश और सुधार नहीं किये गये तो लाखों लोग ऐसी बीमारियों से मरते रहेंगे, जिनका इलाज आसानी से हो सकता है."
तत्काल कार्रवाई की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्जरी तक पहुंच और इसकी गुणवत्ता में सुधार के लिए वैश्विक स्तर पर नीतिगत बदलाव, बुनियादी ढांचे में निवेश और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता जरूरी है. यह अध्ययन नीति निर्माताओं और सरकारों के लिए एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की आवश्यकता है.