गाजियाबाद सबसे प्रदूषित शहर, टॉप 10 में दिल्ली-NCR का दबदबा
नई दिल्ली । डेस्क: सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के नवीनतम विश्लेषण के अनुसार, शीतकालीन सत्र 2025-26 के दौरान गाजियाबाद भारत का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा है. 1 अक्टूबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में बताया गया है कि गाजियाबाद में PM2.5 का औसत स्तर 172 μg/m3 दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय मानकों से कहीं अधिक है.
इस सूची में नोएडा (166 μg/m3) दूसरे और दिल्ली (163 μg/m3) तीसरे स्थान पर रहा. प्रदूषण की यह गंभीर स्थिति केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि टॉप 10 प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, गुड़गांव, भिवाड़ी, चरखी दादरी और बागपत भी शामिल हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश और हरियाणा के चार-चार शहर शामिल हैं.
रिपोर्ट के डरावने आंकड़े बताते हैं कि भारत के 238 शहरों में से 204 शहरों ने राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) का उल्लंघन किया है, जो पिछले साल के 173 शहरों की तुलना में एक बड़ी गिरावट है.
दिल्ली की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही, जहाँ इस सर्दियों के दौरान 18 दिन 'गंभीर' और 87 दिन 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज किए गए, जबकि केवल एक दिन 'अच्छी' हवा नसीब हुई. राज्यों की बात करें तो हरियाणा में सबसे अधिक 24 शहरों ने मानकों को तोड़ा, जबकि राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश के भी अधिकांश शहरों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर रही.
इसके विपरीत, कर्नाटक का चामराजनगर 19 μg/m3 के औसत PM2.5 स्तर के साथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा. स्वच्छ शहरों की सूची में कर्नाटक का वर्चस्व रहा, जहाँ टॉप 10 में से 8 शहर इसी राज्य के थे.
CREA के विश्लेषक मनोज कुमार ने चेतावनी दी है कि केवल NCR के लिए लक्ष्य तय करना काफी नहीं है, बल्कि सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे गैसीय प्रदूषकों को नियंत्रित करने के लिए देशव्यापी सख्त कदम उठाने की जरूरत है.
रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत आने वाले शहरों में से भी 96 में से 84 शहर भारतीय मानकों को पूरा करने में विफल रहे, जबकि सभी 96 शहरों में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देशों से कहीं अधिक पाया गया.