'शांतिदूत’ से जंग के मैदान तक: ट्रंप की वेनेजुएला के बाद 4 देशों पर नजर?
नई दिल्ली । डेस्क: खुद को ‘शांति स्थापित करने वाला’ राष्ट्रपति बताने वाले डोनाल्ड ट्रंप की असल रणनीति एक बार फिर सवालों में है. आठ युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले ट्रंप ने नए साल की शुरुआत वेनेजुएला पर सीधे सैन्य हमले से की. अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटों के ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क पहुंचा दिया. इस कार्रवाई के बाद ट्रंप की तथाकथित शांतिकामी छवि पर गहरी दरार दिखने लगी है.
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर मेक्सिको, कोलंबिया और क्यूबा को खुली चेतावनी दी. उन्होंने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका इन देशों में सीधे दखल देगा और किसी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा.
दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप और मेक्सिको के रिश्ते सबसे ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं. शरणार्थी संकट और भारी टैरिफ नीति ने दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ा दिया है. मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम पार्डो ने अमेरिकी व्यापार नीति और वेनेजुएला हमले की खुलकर आलोचना की है.
कोलंबिया को लेकर भी ट्रंप का रुख आक्रामक है. उन्होंने राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो पर ड्रग नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप लगाया. वहीं क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल को ‘असफल शासक’ बताते हुए ट्रंप ने वहां ‘जनता को आज़ाद कराने’ की बात कही.
लैटिन अमेरिका के बाद ट्रंप की नजर ईरान पर भी है. महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. इससे पहले 2025 में अमेरिकी वायुसेना ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला कर चुकी है.
इतिहास पर नजर डालें तो अमेरिका का इन देशों से टकराव नया नहीं है चाहे मेक्सिको युद्ध हो, क्यूबा में पिग्स बे ऑपरेशन या ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें. अब वेनेजुएला में ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ के जरिए राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर लेना इसी कड़ी का ताजा उदाहरण है.
विश्लेषकों का मानना है कि अगर 2026 में अमेरिका मेक्सिको, कोलंबिया, क्यूबा और ईरान से सीधे टकराव में उतरता है, तो ट्रंप की ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ की दावेदारी और उनकी शांतिदूत छवि दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो जाएंगे.