फ्रांस: राष्ट्रपति चुनाव से 5 महीने पहले फ्रांस में सड़क पर फूटा गुस्सा, पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले फ्रांस में बढ़ती महंगाई और शिक्षा बजट को लेकर प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जहां पेरिस की सड़कों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली.
नई दिल्ली । डेस्क: फ्रांस में सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. शनिवार को देशभर में लगातार चौथे सप्ताहांत हजारों लोग बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के खर्च के खिलाफ सड़कों पर उतरे. यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब महज पांच महीने बाद देश में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं. राष्ट्रपति चुनाव में सुदूर-दक्षिणपंथी ताकतों के सत्ता में आने की मजबूत संभावना जताई जा रही है.
आंकड़ों में प्रदर्शन: गृह मंत्रालय और यूनियनों के दावों में अंतर
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को पूरे फ्रांस में लगभग 1,46,000 लोगों ने प्रदर्शनों में भाग लिया, जिनमें से अकेले पेरिस में 46,000 लोग सड़कों पर थे. वहीं दूसरी ओर, मजदूर यूनियनों ने दावा किया है कि देशभर में 2,50,000 और राजधानी पेरिस में 75,000 प्रदर्शनकारी एकजुट हुए.
हालांकि, यह संख्या पिछले तीन हफ्तों के मुकाबले कम रही. इससे पहले गुरुवार को यूनियनों के सामूहिक प्रदर्शन में अधिकारियों के अनुसार 5,75,000 और यूनियनों के अनुसार 16 लाख लोग शामिल हुए थे.
पेरिस और ल्यों में हिंसा और आंसू गैस के गोले
पेरिस में यूनियनों का प्रदर्शन पारंपरिक मार्ग 'प्लेस डी ला रिपब्लिक' से शुरू होकर 'प्लेस डी ला नेशन' पर समाप्त हुआ, जहां अंत में हिंसा भड़क उठी. उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों पर प्रोजेक्टाइल और घरेलू आतिशबाजी फेंकी, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. पुलिस के अनुसार, कचरे के डिब्बे में आग लगाने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय लगभग 200 उपद्रवियों के समूह ने अधिकारियों पर हमला कर दिया.
इसके अलावा, दक्षिण-पूर्वी शहर ल्यों में भी स्थिति तनावपूर्ण रही, जहां एक अनधिकृत सभा के दौरान सड़क जाम कर रहे सैकड़ों लोगों को हटाने के लिए पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा.
'येलो वेस्ट' की कोशिश नाकाम, 70 हजार सुरक्षाबल तैनात
17 अक्टूबर के हिंसक दंगों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने शनिवार को देशभर में 70,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था. इमैनुएल मैक्रॉन के शुरुआती कार्यकाल को चुनौती देने वाले 'येलो वेस्ट' आंदोलन ने राष्ट्रपति भवन (एलिसी पैलेस) और संसद के पास स्थित 'प्लेस डी ला कॉनकोर्ड' में समानांतर प्रदर्शन का आह्वान किया था.
प्रशासन द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण पुलिस ने भारी नाकेबंदी कर दी. वहां पहुंचे करीब 100 लोगों को पुलिस ने घेर लिया और आंदोलन के समन्वयक बेंजामिन बॉल तथा प्रवक्ता एज़ेलमा सिगॉक्स सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया.
छात्रों की नाराजगी और सुरक्षा बलों पर बर्बरता के आरोप
प्रदर्शन की यह मौजूदा लहर सितंबर के अंत में हाई स्कूल के छात्रों द्वारा स्कूली व्यवस्था और सुविधाओं के विरोध में शुरू हुई थी. अब विश्वविद्यालय के छात्र भी इसमें शामिल हो चुके हैं.
स्टूडेंट यूनियन की प्रवक्ता सबाइन खारबाच ने कहा कि सरकार की प्रतिक्रियाएं असंतोषजनक हैं और दबाव बनाए रखने के लिए यह लामबंदी जरूरी है. दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई और बर्बरता के आरोपों की दर्जनों आंतरिक जांचें भी चल रही हैं.
ठप पड़ते व्यापार से कारोबारी परेशान
लगातार हो रहे प्रदर्शनों से स्थानीय व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. मुख्य प्रदर्शन मार्ग के पास दुकान चलाने वाले मैनेजर जीन एमिल मोलिनियर ने चिंता जताते हुए कहा कि सुरक्षा बैरिकेड्स के कारण ग्राहक नहीं आ पा रहे हैं और अगर ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही आपदा जैसी स्थिति हो जाएगी.
तोड़फोड़ की आशंका से पेरिस और अन्य शहरों में दुकानों के शीशों को लकड़ी के तख्तों से ढक दिया गया है और कई दुकानें बंद रखी गईं.
भारी कर्ज से घिरी सरकार पर दबाव, मंगलवार को हड़ताल की चेतावनी
आर्थिक तंगी और देश पर बढ़ते विशाल कर्ज के कारण सरकार के लिए राहत उपायों का ऐलान करना आसान नहीं है. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को वेतन और क्रय शक्ति पर चर्चा के लिए यूनियनों और नियोक्ता परिसंघ के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने वाले हैं.
लेकिन छात्र और शिक्षक समूहों ने शिक्षा बजट बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को फिर से हड़ताल का आह्वान किया है. उनका कहना है कि वे मजबूत स्थिति में हैं और कमजोर पड़ती सरकार अब झुकने लगी है.
2027 के चुनाव और मेलोनशॉन का दावा
राजनीतिक मोर्चे पर, ओपिनियन पोल संकेत दे रहे हैं कि 2027 के एलिसी (राष्ट्रपति) चुनाव में सुदूर-दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन दौड़ में सबसे आगे चल रही हैं. वहीं, मैक्रॉन के मध्यमार्गी पूर्व सहयोगियों के बजाय कट्टर वामपंथी नेता ज्यां-लुस मेलोनशॉन उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रहे हैं.
पेरिस के बाहर 20,000 लोगों की रैली को संबोधित करते हुए मेलोनशॉन ने हुंकार भरी कि "हम जीतने जा रहे हैं" और अब "सब कुछ बदलना होगा".