डेमोक्रेट्स की जीत से वॉल स्ट्रीट में हड़कंप, क्या खतरे में है AI का भविष्य?
अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद वॉल स्ट्रीट पर टेक और एआई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है. 'डेटा सेंटर मोराटोरियम एक्ट' और सख्त एआई नियमों के प्रस्तावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
नई दिल्ली । डेस्क: अमरीकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की जीत के साथ ही वॉल स्ट्रीट पर शेयरों को बेचने की होड़ मच गई है. इस राजनीतिक उलटफेर का सबसे बड़ा और सीधा असर टेक्नोलॉजी सेक्टर, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है. टेक बाजार में आई इस अचानक गिरावट के बाद अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या अमरीका में सत्ता का संतुलन बदलने से एआई का विकास रुक जाएगा या इसका भविष्य संकट में पड़ जाएगा.
डेटा सेंटर मोराटोरियम एक्ट ने बढ़ाई निवेशकों की धड़कनें
बाजार में जारी इस हलचल और निवेशकों के मन में उठ रहे सवालों की वजह महज एक संयोग नहीं है. डेमोक्रेट्स द्वारा 'डेटा सेंटर मोराटोरियम एक्ट' नाम से एक नया कानून लाने की तैयारी की खबरें सामने आ रही हैं, जिसने एआई क्षेत्र के निवेशकों को गहरी चिंता में डाल दिया है. इस प्रस्तावित कानून के तहत अमरीका में एआई के लिए नए डेटा सेंटरों के निर्माण पर अस्थायी रोक लगाने का प्रावधान है. इसके अलावा, जो डेटा सेंटर पहले से संचालित हैं या शुरू होने की स्थिति में हैं, उनकी क्षमता बढ़ाने पर भी पाबंदी रहेगी. यह सख्त नीति तब तक लागू रखने की बात कही गई है जब तक कि सरकार एआई को लेकर व्यापक फेडरल सुरक्षा तंत्र तैयार नहीं कर लेती.
आम जनता की सुरक्षा और संसाधनों के सही इस्तेमाल पर जोर
एआई तकनीक के संचालन में भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है. हालांकि, इस विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि एआई के कारण बढ़ने वाले बिजली बिलों का बोझ किसी भी हाल में आम जनता की जेब पर नहीं पड़ना चाहिए. इसके साथ ही, एआई के कारण होने वाली छंटनी से कर्मचारियों को सुरक्षा देने, आम नागरिकों की गोपनीयता बनाए रखने और एआई से पैदा होने वाली आर्थिक समृद्धि को कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित रहने से रोककर पूरे समाज के हित में इस्तेमाल करने पर विशेष जोर दिया गया है.
कानून बनने की राह में राष्ट्रपति के वीटो की चुनौती
इस विधेयक को इसी साल मार्च के महीने में सीनेटर बर्नी सैंडर्स और प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेस ने पेश किया था, लेकिन उस समय इसे नजरअंदाज कर दिया गया था. 3 नवंबर को कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद सैंडर्स ने इसे दोबारा पेश करने की मांग की है. हालांकि, इस बिल का कांग्रेस में पेश होना ही इसके कानून बनने की गारंटी नहीं है. डेमोक्रेट्स के पास कांग्रेस का नियंत्रण होने के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप के पास मौजूद वीटो पावर के कारण निकट भविष्य में इसके कानून का रूप लेने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है.
बिकवाली की होड़ में चिप निर्माताओं और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को भारी नुकसान
कानूनी अड़चनों के बावजूद शेयर बाजार के लिए यह घटनाक्रम बेहद संवेदनशील साबित हो रहा है. निवेशकों को डर है कि डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली कांग्रेस एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की मौजूदा रफ्तार को धीमा कर सकती है. चुनावी प्रचार के दौरान भी कई डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने अत्यधिक बिजली खपत, पर्यावरण पर असर और स्थानीय समुदायों के बढ़ते खर्चों का हवाला देते हुए डेटा सेंटरों के तेजी से होते विस्तार का विरोध किया था.
सख्त नियमों और ऊर्जा उपयोग पर निगरानी की आशंका से घबराए निवेशकों ने यह सोचना शुरू कर दिया है कि क्या टेक और एआई शेयरों की कीमतें बहुत तेजी से और जरूरत से ज्यादा बढ़ गई थीं. इसी आशंका के चलते बाजार में शेयर बेचने की होड़ मच गई, जिससे चिप निर्माता कंपनियों और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाले संस्थानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.