छत्तीसगढ़ में अफीम की चौथी खेती का खुलासा, यहां भी झारखंड का आरोपी
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती का चौथा मामला सामने आया है, जिसने राज्य पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है. दुर्ग और बलरामपुर के बाद अब रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में लगभग डेढ़ एकड़ भूमि पर अफीम की अवैध खेती पकड़ी गई है.
पिछले 15 दिनों के भीतर प्रदेश में यह चौथा बड़ा मामला है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में अफीम तस्करों का एक बड़ा अंतर्राज्यीय नेटवर्क सक्रिय हो चुका है. पुलिस ने इस मामले में झारखंड के खूंटी जिले के रहने वाले मार्शल सांगा को हिरासत में लिया है, जिससे कड़ी पूछताछ की जा रही है.
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने एक स्थानीय किसान से तरबूज और खीरा उगाने के बहाने जमीन पट्टे पर ली थी, लेकिन उसकी आड़ में वह प्रतिबंधित अफीम की फसल उगा रहा था.
रायगढ़ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह को जब इस गुप्त खेती की सूचना मिली, तो उन्होंने तत्काल तमनार और पूंजीपथरा पुलिस को सत्यापन के निर्देश दिए. मुखबिरों के माध्यम से जानकारी पुख्ता होने के बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने आमघाट इलाके में छापेमारी की.
मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि विशाल क्षेत्र में अफीम की फसल तैयार खड़ी थी. फॉरेंसिक लैब की टीम को भी रायपुर से विशेष रूप से बुलाया गया ताकि फसल की गुणवत्ता और उसके अफीम होने की वैज्ञानिक पुष्टि की जा सके.
पुलिस के अनुसार, मार्शल सांगा पिछले कुछ वर्षों से इस इलाके में रह रहा था और संदेह है कि वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर लंबे समय से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था. इस मामले में पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि संबंधित जमीन निजी है या सरकारी.
छत्तीसगढ़ में बीते पखवाड़े में जिस तरह से एक के बाद एक अफीम के खेत मिल रहे हैं, उसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है.
सबसे पहले 7 मार्च को दुर्ग जिले में पांच एकड़ से अधिक जमीन पर 7.88 करोड़ रुपये की अफीम पकड़ी गई थी, जिसमें एक स्थानीय भाजपा नेता की गिरफ्तारी भी हुई थी. इसके बाद 10 और 12 मार्च को बलरामपुर जिले में दो अलग-अलग स्थानों पर बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का भंडाफोड़ हुआ.
इन सभी मामलों में एक साझा पैटर्न उभर कर सामने आ रहा है, जिसमें पड़ोसी राज्य झारखंड के तस्करों की संलिप्तता पाई गई है. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि दुर्गम और दूरस्थ इलाकों को ढाल बनाकर तस्कर स्थानीय किसानों को झांसा देकर इस अवैध कारोबार का विस्तार कर रहे हैं. फिलहाल रायगढ़ पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है, ताकि इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जा सके.