रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

राजस्थान में बच्चों की मौत जेनेरिक कफ सिरप से- दावा FMRAI

C

CG Khabar

11 अक्टू. 2025, 04:36 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

कफ सिरप
कफ सिरप

कोलकाता । डेस्क: मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (FMRAI) ने राजस्थान में जेनेरिक कफ सिरप से तीन बच्चों की मौत पर गहन शोक व्यक्त किया है. ये सिरप सरकारी सप्लाई से विभिन्न स्थानों पर वितरित किए गए थे. राज्य के कई हिस्सों में उसी बैच के सिरप पीने से कई बच्चे बीमार भी पड़े.


FMRAI के महासचिव ने सीजीखबर के सीनियर उप संपादक जेके कर से हुई बातचीत में भी इस बात का दावा किया है कि राजस्थान में हुई मौंते सरकारी सप्लाई में दिये गये जेनेरिक कफ सिरप से हुई हैं. उन्होंने आगे कहा कि वहां के चिकित्सक भी यही बात कर रहे हैं.

विज्ञापन


इसके तुरंत बाद मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से 20 बच्चों को किडनी फेलियर हो गया, जिससे उनकी मौत हो गई. दोनों मामलों में कारण एक ही था- औद्योगिक सॉल्वेंट डायइथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की असामान्य रूप से अधिक मात्रा. केसन फार्मा (राजस्थान) और स्रेसन फार्मा (तमिलनाडु) अलग-अलग कंपनियां हैं, लेकिन समस्या समान है.


FMRAI ने कहा कि यह पहला मामला नहीं है. 1972 से भारत में DEG-युक्त दवाओं से पांच बार बच्चों की मौतें हुई हैं. 1998 में 36 बच्चे, 2019 में जम्मू में 11 शिशु प्रभावित हुए. गाम्बिया और उज्बेकिस्तान जैसे निर्यात बाजारों में भी भारतीय दवाओं से बच्चों की मौतें दर्ज हैं.


विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घटना पर दुख जताया और CDSCO से स्पष्टीकरण मांगा. CDSCO ने स्वीकार किया कि कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश टीआर और रीलाइफ सिरप में DEG पाया गया. कोल्ड्रिफ में यह 48% तक एक्सीपिएंट के रूप में था, जो गुणवत्ता नियंत्रण की लापरवाही दर्शाता है.


FMRAI ने सरकार से सवाल किया कि बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? यह नियामक तंत्र की व्यवस्थित विफलता है. भारत 'विश्व की फार्मेसी' का दावा करता है, लेकिन अपने बच्चों को मिलावटी दवाओं से नहीं बचा पा रहा. 2022 में गाम्बिया में 69 और उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत के बाद निर्यात सिरपों के लिए टेस्टिंग अनिवार्य हुई, लेकिन घरेलू बाजार पर लागू नहीं.


पिछले दशक में औसतन 3200 से अधिक दवाएं NSQ (नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी) पाई गईं, 267 मिलावटी. FMRAI की मांग है: सभी ऐसी कंपनियों के लाइसेंस तत्काल रद्द करें, कड़ी सजा दें. सभी दवाओं की गुणवत्ता जांच अनिवार्य हो और लागत-आधारित मूल्य नियंत्रण लागू करें, ताकि मिलावटी दवाएं बाजार में न आएं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP