छत्तीसगढ़ में UCC के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस संबंध में अधिसूचना साझा करते हुए इसकी पुष्टि की. गौरतलब है कि न्यायमूर्ति देसाई पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की समिति का नेतृत्व कर रही हैं.
इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश के अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एमके राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और पूर्व प्राचार्या ज्योति रानी सिंह को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
समिति को छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता की वर्तमान कानूनी स्थिति का अध्ययन करने और विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, विरासत तथा गोद लेने जैसे संवेदनशील विषयों पर अपनी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
अपने काम को व्यापक बनाने के लिए समिति आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेगी, साथ ही अन्य राज्यों में लागू यूसीसी व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी. इसके बाद समिति एक अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर आवश्यक विधायी और प्रशासनिक सिफारिशों के साथ सरकार को सौंपेगी.
इससे पहले, इसी साल 15 अप्रैल को छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए इस समिति के गठन को मंजूरी दी थी.
सरकार का मानना है कि इस कदम से कानून सरल होंगे और धार्मिक व लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि अलग-अलग व्यक्तिगत कानून कानूनी प्रक्रियाओं में असमानता पैदा करते हैं और न्याय व्यवस्था को जटिल बनाते हैं.
दूसरी ओर, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस प्रस्ताव की आलोचना की है और इसे आदिवासी अधिकारों के लिए बड़ा खतरा बताते हुए दावा किया है कि इसके लागू होने से आदिवासी समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.
गौरतलब है कि जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई भारत की एक प्रतिष्ठित न्यायविद और सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं. उनका जन्म 30 अक्टूबर 1949 को हुआ था. उन्होंने 1970 में एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और 1973 में कानूनी पेशे की शुरुआत की.
अपने करियर के दौरान उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में सरकारी वकील के रूप में कार्य किया और 1996 में उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया. इसके बाद, साल 2011 में वह देश की सर्वोच्च अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनीं और 2014 तक इस पद पर रहीं.
सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण सरकारी और कानूनी दायित्वों को निभाया है. वह भारतीय प्रेस परिषद (प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया) की अध्यक्ष रहने वाली पहली महिला बनीं.
इसके अलावा, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए गठित परिसीमन आयोग (डीलिमिटेशन कमीशन) की अध्यक्षता भी की थी.
हाल के वर्षों में वह समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समितियों से जुड़ने के कारण काफी चर्चा में रही हैं.
उन्होंने उत्तराखंड में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व किया और इसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी यूसीसी के लिए गठित उच्च स्तरीय समितियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्हें देश के कानूनी ढांचे और सामाजिक-कानूनी सुधारों में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है.