शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

मुखबिरी के शक में हर 5वें दिन एक निर्दोष की हत्या

छत्तीसगढ़ में मुखबिरी के शक में नक्सली कर रहे हर 5वें दिन एक निर्दोष नागरिक की हत्या

C

CG Khabar

21 मार्च 2025, 12:42 PM 4 मिनट में पढ़ें 3

मुखबिरी के शक में हर 5वें दिन एक निर्दोष की हत्या

रायपुर | डेस्कः छत्तीसगढ़ के बस्तर में आये दिन निर्दोष नागरिक मौत के घाट उतारे जा रहे हैं जो ना तो सुरक्षाबल के जवान हैं और ना ही माओवादी.


आंकड़ों की भयावहता का अनुमान आप इससे लगा सकते हैं कि लगभग हर पांचवें दिन ऐसे लोग मारे जा रहे हैं. जिन्हें माओवादी  मुखबिर कहते हैं.


छत्तीसगढ़ में पुलिस मुखबिरी के शक में माओवादियों ने पिछले एक साल में 64 आम नागरिकों की हत्या की है. 


विधानसभा में राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जनवरी 2024 से लेकर फरवरी 2025 तक के आंकड़े पेश किए. 


इससे पता चलता है कि माओवादियों ने मुखबिरी के शक में 60 ग्रामीणों, 3 जनप्रतिनिधियों व 1 व्यवसायी सहित 64 लोगों की हत्या की है.


इसके साथ ही अन्य कारणों के चलते माओवादियों ने 10 आम नागरिकों की हत्या की है. 


इस तरह माओवादियों द्वारा 13 महीने में कुल 74 आम नागरिकों की हत्या हुई है. इस मामले पर गौर करने पर पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में हर महीने 5 से 6 निर्दोष नागरिकों की हत्या माओवादी कर रहे हैं.

 

पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के ससुर की हत्या


अभी हाल ही में सुकमा जिले में माओवादियों ने पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के ससुर की हत्या कर दी. 


पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मारे गए ग्रामीण कमलू हिड़मा (60) कोंटा के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के छोटे ससुर थे.


नक्सलियों से मिली चेतावनी के बाद वे बीते दो वर्षों से कोंटा बेस कैम्प में ही रहते थे.  जिस दौरान  माओवादियों ने हिडमा को मारा वे अपने मूल गांव पेंटापाड़ त्योहार मनाने गए थे. 


असल में डब्बाकोंटा में सुरक्षा बलों के नये कैंप खुलने और नक्सलवाद के खात्मे की खबरों के चलते हिम्मत कर कमलू हिड़मा अपने गांव पहुंचे थे, जहां संदिग्ध माओवादियों ने उन्हें मार डाला.


इस मामले में पुलिस फिलहाल जाँच कर रही है.

 

डर की बुनियाद पर खड़ा सम्राज्य

दरअसल नक्सली जानते हैं कि उनका पूरा साम्राज्य डर की बुनियाद पर खड़ा है. अगर  एकबार आदिवासियों के भीतर से नक्सलियों का डर ख़त्म हो गया तो नक्सलियों के लिए अपना जनाधार बचा और बना पाना असंभव हो जाएगा. 


यही कारण है कि समय-समय पर अपने विरोधियों को मुखबिर बता कर उनकी हत्या माओवादी करते रहते हैं. 


अक्सर ऐसी हत्याओं के लिए वे कथित जन अदालत लगाते हैं. कथित इसलिए क्योंकि यह असल में उनकी ही अदालत होती है, उनके ही आरोप और उनकी ही गवाही पर, वही सज़ा भी सुनाते हैं. 


इस जनअदालत में कथित मुखबिर की हत्या वे बेहद क्रूर और वहशी तरीके से करते हैं, ताकि लोगों में खौफ का साम्राज्य बरकरार रहे.


पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि युद्ध क्षेत्र में बदल चुके बस्तर में माओवादियों और पुलिस के जवान जितनी बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं, उसका लगभग चौथाई आंकड़ा ऐसे लोगों का है, जिन्हें मुखबिर बता कर मारा गया.


सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के बीच, मुखबिर के नाम पर होने वाली हत्याओं की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती चली गई है.


इसके अलावा एक बार फिर माओवादियों ने उनका समर्थन नहीं करने वाले ग्रामीणों को गांव से खदेड़ने का काम शुरु किया है.

 

जनअदालत लगाकर परिवारों को गांव के बाहर खदेड़ा

हाल ही में दंतेवाड़ा जिले के दो गांवों के 8 परिवारों को माओवादियों ने गांव से बाहर निकाल दिया.


ये ग्रामीण बारसूर थाना क्षेत्र के तुशवाल ग्राम पंचायत के हैं. इन ग्रामीणों पर माओवादियों ने पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया.


माओवादियों ने धमकी दी  कि वापस गांव लौटे तो जान से मार दिए जाओगे.  इस नक्सल फरमान के बाद ग्रामीण अपना घर, जमीन और मवेशी छोड़कर चले गए हैं. 


कहा जा रहा है कि यह फरमान सुनाने रात के वक्त 50 से ज्यादा की संख्या में माओवादी गांव में पहुंचे थे और जनअदालत  लगाकर यह फरमान सुनाया. 


पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी है.

 

पिस रहा बस्तर का आदिवासी

बस्तर के निर्दोष नागरिक कभी पुलिस मुखबिरी के शक में माओवादियों द्वारा मारे जाते हैं तो कभी नक्सली होने के शक में फर्जी एनकाउंटर का शिकार होते हैं या जेल में डाल दिये जाते हैं.


एक तरफ़ कथित क्रांति की विरासत के वाहक आदिवासियों को मार रहे हैं तो दूसरी ओर संविधान में आस्था जताने वाले आदिवासियों को मार रहे हैं. 


ज़ाहिर है, बस्तर का आदिवासी इस युद्ध में दो पाटों के बीच बुरी तरह पिस रहा है और कम से कम अभी तो इससे मुक्ति का कोई रास्ता नज़र नहीं आता.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP