शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

अवैध पदोन्नति से कर्मचारियों को कोई स्थाई अधिकार नहीं मिलता: HC

C

CG Khabar

29 जुल. 2026, 02:25 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि वैधानिक नियमों को दरकिनार कर दी गई कोई भी प्रमोशन पूरी तरह अवैध है और इसे किसी भी समय सुधारा जा सकता है. अदालत ने कहा कि ऐसी गलत पदोन्नति के आधार पर कोई भी कर्मचारी भविष्य में उस पद पर बने रहने के अपने अधिकार का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि कानून के खिलाफ कोई 'एस्टोपल' (प्रतिबंध) लागू नहीं होता.


जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ ने निर्णय सुनाया कि यदि पदोन्नति भर्ती व पदोन्नति नियमों के विपरीत दी गई है, तो राज्य सरकार के पास उसे रद्द करने का पूरा अधिकार है. बशर्ते इस प्रक्रिया में प्रभावित कर्मचारियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया हो.


यह मामला जल संसाधन विभाग के दो जीप चालकों से जुड़ा है, जिन्हें अप्रैल 2023 में मैकेनिक ग्रेड-II के पद पर पदोन्नत किया गया था. बाद में विभागीय जांच में पाया गया कि यह चयन प्रक्रिया कार्य-भारित (वर्क-चार्ज्ड) कर्मचारियों के लिए तय वैधानिक नियमों के अनुकूल नहीं थी. 


इसके बाद विभाग ने 25 जून 2026 को उनकी पदोन्नति रद्द कर दी थी, जिसे कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.


याचिकाकर्ताओं की इस तर्क को खारिज करते हुए कि यह कार्रवाई दंडात्मक है, अदालत ने साफ किया कि यह कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या कदाचार का मामला नहीं है. यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) द्वारा की गई अनियमितता को सुधारना था. 


अदालत ने यह भी पाया कि कार्रवाई से पहले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और उनके जवाब पर विचार करने के बाद ही आदेश पारित किया गया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूरा पालन हुआ है.


उच्च न्यायालय ने फंडामेंटल रूल 31-A का उल्लेख करते हुए दोहराया कि बिना किसी धोखाधड़ी या गलत बयानी के भी यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक उस पद पर कार्य करता रहा हो, तब भी मूल रूप से अवैध नियुक्ति को वैध नहीं ठहराया जा सकता. चूंकि याचिकाकर्ता विभाग की कार्रवाई में कोई द्वेष या कानूनी त्रुटि साबित करने में विफल रहे, इसलिए अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP