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असम, बंगाल में चुनाव की घोषणा, जानें किस राज्य में क्या है हाल

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15 मार्च 2026, 11:06 AM 5 मिनट में पढ़ें 1

असम, बंगाल में चुनाव
असम, बंगाल में चुनाव

नई दिल्ली | डेस्क: पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में होंगे, पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा. जबकि असम में 9 अप्रैल को चुनाव होंगे. देश के पांच राज्यों में मतगणना 4 मई को की जाएगी.


चुनाव आयोग ने भारत के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों की आधिकारिक घोषणा कर दी है. इस घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में तुरंत आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, जिसके तहत सरकारें और राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया के दौरान कई नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे.


मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन चुनावों की तारीख़ों और पूरी प्रक्रिया की जानकारी साझा की. 


उन्होंने बताया कि इस बार असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में अलग-अलग चरणों में मतदान कराया जाएगा.


मतदान की तारीख़ें


चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा. तमिलनाडु में भी एक चरण में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे.


जबकि पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में होंगे, पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा.


इसके अलावा, विभिन्न राज्यों की कुल आठ विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव होंगे. इन सीटों के लिए मतदान 9 और 23 अप्रैल को कराया जाएगा. सभी राज्यों के चुनावों और उपचुनावों की मतगणना 4 मई को एक साथ की जाएगी, जिसके बाद नई सरकारों का रास्ता साफ होगा.


राज्यों की राजनीतिक स्थिति


पश्चिम बंगाल


294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की सरकार है. इस सदन में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान में टीएमसी के पास लगभग 223 विधायक हैं.


2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी. राज्य में टीएमसी की सरकार 2011 से लगातार सत्ता में है और पार्टी की नेता ममता बनर्जी तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं.


इस बार का चुनाव राज्य में बेहद दिलचस्प माना जा रहा है. एक तरफ ममता बनर्जी अपनी सरकार को चौथी बार सत्ता में लाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी पूरे जोर-शोर से सत्ता परिवर्तन का प्रयास कर रही है.


चुनाव में एक नया मोड़ तब आया जब टीएमसी के पूर्व नेता हुमायूं कबीर ने पार्टी से अलग होकर अपनी नई राजनीतिक पार्टी बना ली. उन्होंने राज्य के कुछ इलाकों में अलग राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश की है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी नई राजनीतिक रणनीति से किस दल को फायदा होता है और किसे नुकसान.


तमिलनाडु


234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में पिछली बार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 159 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) को 75 सीटें मिली थीं.


राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन इस चुनाव में भी अपनी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने के लिए मैदान में हैं.


बीजेपी भी दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने के प्रयास में लगी हुई है. पिछले चुनाव में पार्टी ने 4 सीटें जीती थीं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं.


इस बार राज्य में डिलिमिटेशन (सीमांकन) का मुद्दा भी प्रमुख राजनीतिक बहस बन गया है. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताक़त को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है. इसलिए तमिलनाडु का चुनाव राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.


केरल


140 सीटों वाली केरल विधानसभा में पिछली बार लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) ने जीत दर्ज की थी. इस गठबंधन ने 99 सीटों पर कब्ज़ा किया था, जबकि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को 41 सीटें मिली थीं.


केरल में आम तौर पर सत्ता एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बदलती रहती है, लेकिन पिछली बार एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर इतिहास बनाया था.


बीजेपी भी इस राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. पिछले चुनाव में पार्टी ने 115 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे कोई सीट नहीं मिली थी और उसके कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. इस कारण इस बार का चुनाव बीजेपी के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा है.


असम


126 सीटों वाली असम विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 20 मई 2026 को समाप्त होने वाला है.


2016 में पहली बार सत्ता में आई बीजेपी ने 2021 के चुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया था. उस समय पार्टी ने 93 सीटों पर चुनाव लड़ा और 60 सीटें जीत लीं. उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने कुल 75 सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाई थी.


राज्य में हाल के दिनों में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दे काफी चर्चा में रहे हैं. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपने कई बयानों को लेकर विवादों में भी रहे हैं.


वहीं कांग्रेस भी राज्य में सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है. पार्टी ने प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनावी स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख बनाया है और उन्होंने राज्य में दौरे शुरू कर दिए हैं.


पुडुचेरी


केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कुल 30 विधानसभा सीटें हैं.


2021 के चुनावों में यहां बीजेपी ने 6 सीटें जीती थीं, जबकि ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) को 10 और डीएमके को 6 सीटों पर जीत मिली थी.


छोटा प्रदेश होने के बावजूद यहां की राजनीति अक्सर राष्ट्रीय दलों और क्षेत्रीय दलों के गठबंधन पर निर्भर रहती है, इसलिए हर चुनाव में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते रहते हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP