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ED ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को किया गिरफ्तार

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11 अग. 2026, 02:26 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

रामगोपाल अग्रवाल
रामगोपाल अग्रवाल

नई दिल्ली । डेस्क: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता और पार्टी के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है. केंद्रीय जांच एजेंसी अब आरोपी को अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए कस्टडी की मांग कर रही है. रामगोपाल अग्रवाल पहले से ही 19 अगस्त तक ज्यूडिशल कस्टडी में रायपुर के सेंट्रल जेल में बंद हैं.  


प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ता सौरभ कुमार पाण्डेय ने बताया कि कांग्रेस पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रहे रामगोपाल अग्रवाल जो कि वर्तमान में रायपुर के सेंट्रल जेल में बंद है. वहां पर प्रवर्तन निदेशालय की टीम गई हुई थी और उन्हें शराब घोटाले मामले में गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार करने के बाद सक्षम न्यायालय में 7 दिनों की कस्टोडियल रिमांड की मांग प्रवर्तन निदेशालय ने की है. अब यह कोर्ट के ऊपर निर्भर करता है कि वह कितने दिनों के लिए प्रवर्तन निदेशालय को कस्टोडियल रिमांड देगी.

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ईडी के अनुसार, यह कथित शराब घोटाला साल 2019 से 2022 के दौरान उस समय को अंजाम दिया गया, जब राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि वरिष्ठ नौकरशाहों और प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों के एक आपराधिक सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया था. इस सिंडिकेट के कारण राज्य के सरकारी खजाने को करीब 2,883 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचा.  


जांच एजेंसी ने इस मामले को लेकर अब तक सात चार्जशीट दाखिल की हैं, जिनमें 85 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास, पूर्व संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं.  


ईडी ने आरोप लगाया कि 2019 से 2023 के बीच राज्य में शराब का पूरा व्यापार किसी वैध तंत्र के बजाय नीति की आड़ में और राजनीतिक रसूख के बल पर चलाया जा रहा एक वसूली रैकेट बन गया था. एजेंसी का दावा है कि पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे इस पूरे नेटवर्क के केंद्र में थे, जो कथित तौर पर काले धन को रियल एस्टेट में खपाने और नकदी के दम पर अपना प्रभाव बढ़ाने में शामिल थे.  


जांच एजेंसी के मुताबिक, चैतन्य बघेल की रियल एस्टेट परियोजना 'विट्ठल ग्रीन' का इस्तेमाल शराब घोटाले से कमाए अवैध धन को सफेद करने के लिए एक माध्यम के रूप में किया गया था. दिखने में यह एक आवासीय परिसर था, लेकिन एजेंसी के शब्दों में यह असल में भ्रष्टाचार का एक अड्डा बना हुआ था. 

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP