मेडिकल घोटाले में ईडी को मिले कई सबूत
रायपुर | संवाददाता: देशभर में मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के नाम पर चल रहे स्कैम ने कई सबूत इकट्ठे किए हैं. शुक्रवार को देश भर में की गई छापामारी में, ईडी ने रायपुर से कई महत्वपूर्ण सबूत मिलने का दावा किया है.
इस बड़े रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार नेटवर्क का राज खुलने के बाद इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने छत्तीसगढ़ सहित आठ राज्यों में एक साथ व्यापक कार्रवाई की. इस कार्रवाई में रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज भी शामिल रहा, जहां जांच टीम ने कई घंटे तलाशी की.
ईडी के अनुसार छापेमारी के दौरान डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी के घर और कॉलेज से ईडी ने कई डिजिटल सबूत, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए, जिनमें मोबाइल फोन, DVR, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क शामिल हैं. साथ ही, संबंधित बैंक खातों की विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है. ईडी की तकनीकी टीम इन सभी सबूतों की गहन जांच कर रही है.
जांच एजेंसी के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के बीच लंबे समय से एक गुप्त रिश्ता बना हुआ था, जिसके तहत मंत्रालय के भीतर से निरीक्षण से जुड़ी गोपनीय जानकारियां समय से पहले कॉलेजों तक पहुंचा दी जाती थीं. इसका फायदा यह कॉलेज इस तरह उठाते थे कि निरीक्षण टीम के आने से ठीक पहले फर्जी मरीजों की भर्ती, नाममात्र की फैकल्टी की उपस्थिति और अस्पताल की क्षमता बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने जैसी व्यवस्थाएं कर दी जाती थीं.
आरोप है कि निरीक्षण टीमों से अनुकूल रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए बिचौलियों के जरिए बड़े पैमाने पर रिश्वत का आदान-प्रदान किया जाता था, ताकि कॉलेजों को मान्यता मिल सके या सीटें बढ़ाने की स्वीकृति प्राप्त हो सके.
गौरतलब है कि ईडी ने यह जांच सीबीआई की दिल्ली स्थित AC-III शाखा द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू की है. एफआईआर में निजी मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों और बिचौलियों से मिलकर बने एक संगठित नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इस नेटवर्क ने निरीक्षण प्रक्रिया को प्रभावित कर मेडिकल कॉलेजों को अनुचित लाभ पहुंचाया.
रावतपुरा मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी को पहले ही सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है और वे वर्तमान में जमानत पर हैं. जांच में सामने आया है कि कॉलेज में सीटें बढ़ाने के लिए किए गए लेन-देन हवाला चैनलों के जरिए संचालित हुए थे, जिसके चलते मामला अब मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आ गया है.
इसी जांच के सिलसिले में 30 जून 2025 को नेशनल मेडिकल कमीशन की निरीक्षण टीम रावतपुरा मेडिकल कॉलेज पहुंची थी. टीम में डॉ. मंजप्पा सीएन, डॉ. चैत्रा एमएस और डॉ. अशोक शेलके शामिल थे. आरोप है कि निरीक्षण के दौरान ही डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी ने सीधे टीम प्रमुख डॉ. मंजप्पा को कॉलेज के पक्ष में रिपोर्ट तैयार करने के बदले आर्थिक लाभ का प्रस्ताव रखा.
इस प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के बाद डॉ. मंजप्पा ने अपने सहयोगी सतीश ए. को हवाला नेटवर्क से 55 लाख रुपये की राशि एकत्र करने के निर्देश दिए. बताया गया कि डील तय होते ही टीम के अन्य सदस्यों को भी उनके हिस्से की राशि पहुंचाने की व्यवस्था कर दी गई थी, जिसके तहत डॉ. चैत्रा के हिस्से की रकम उनके पति को सौंपने का निर्देश दिया गया था.
सीबीआई लंबे समय से इस पूरी गतिविधि पर नजर रख रही थी. जैसे ही रिश्वत की राशि जुटाने की पुष्टि हुई, एजेंसी ने बेंगलुरु में जाल बिछाया और 55 लाख रुपये की राशि बरामद कर ली. इस रकम में से 16.62 लाख रुपये डॉ. चैत्रा के पति रविन्द्रन से और 38.38 लाख रुपये सतीश ए. से जब्त किए गए.
इसके बाद एक जुलाई को सीबीआई ने रायपुर से डॉ. मंजप्पा, डॉ. चैत्रा, डॉ. अशोक और अतुल कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया, जबकि बेंगलुरु से सतीश ए. और रविचंद्र के. को हिरासत में लेकर रायपुर लाया गया. सभी आरोपियों को 2 जुलाई को रायपुर स्थित स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां आगे की कार्रवाई जारी है.
सीबीआई ने 30 जून को इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ देशभर में बड़ी कार्रवाई की थी. छत्तीसगढ़, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में 40 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई. मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और सीटें बढ़ाने के नाम पर हुए इस बड़े घोटाले में तीन डॉक्टरों सहित कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया.