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RTI में संशोधन का प्रस्ताव: आंतरिक दस्तावेज दायरे से बाहर रखने की तैयारी

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29 जन. 2026, 04:31 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

निर्मला सीतारमण
निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को लोकसभा में पेश किए गए 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' में सूचना का अधिकार कानून की समीक्षा और उसमें संशोधन का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा गया है. सरकार ने शासन व्यवस्था और गोपनीयता का हवाला देते हुए कुछ आंतरिक दस्तावेजों और ड्राफ्ट रिपोर्टों को RTI के दायरे से बाहर रखने की बात कही है. 


सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक जानकारी सार्वजनिक करने से प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है. आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) द्वारा जारी इस रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि सरकारी अधिकारी बिना किसी डर के अपनी राय साझा कर सकें, इसके लिए फाइलों के नोट्स और ड्राफ्ट रिपोर्ट को गोपनीय रखना आवश्यक है.


हालांकि, सरकार के इस कदम का सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस संशोधन के जरिए सरकार महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाकर जनविरोधी कदम उठाने के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार कर रही है. 


वर्तमान में RTI अधिनियम, 2005 की धारा 2(F) के तहत सरकारी रिकॉर्ड, मेमो और सर्कुलर 'सूचना' की श्रेणी में आते हैं, जिन्हें नागरिक मांग सकते हैं. 

सरकार का कहना है कि यह प्रस्ताव पारदर्शिता के खिलाफ नहीं है, बल्कि सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश है, ताकि नीति निर्धारण की आंतरिक प्रक्रिया सुरक्षित रहे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP