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डोनाल्ड ट्रंप को है कम्युनिज्म का डर

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04 जुल. 2026, 07:47 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप

साउथ डकोटा । डेस्क: संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्रता के 250वें वर्ष में प्रवेश करने के ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नाम एक बेहद आक्रामक और कड़ा संदेश जारी किया है. साउथ डकोटा के प्रसिद्ध माउंट रशमोर स्मारक पर पूर्व राष्ट्रपतियों की विशाल आकृतियों के सामने खड़े होकर ट्रंप ने साम्यवाद (कम्युनिज्म) की विचारधारा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कम्युनिज्म को अमेरिकी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा अस्तित्वगत संकट करार देते हुए कहा कि यह विचारधारा अमेरिकी स्वतंत्रता के लिए एक 'मरणशील खतरा' है. 


राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में आने वाले समय को केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि अमेरिकी आत्मा को बचाने के लिए एक निर्णायक लड़ाई के रूप में पेश किया. उन्होंने चेतावनी दी कि यह एक ऐसी विनाशकारी शक्ति है जो देश की बुनियादी नींव को हिलाकर रख देना चाहती है.


राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि शीत युद्ध में कम्युनिज्म के खिलाफ एक बड़ी जीत दर्ज करने के ठीक एक पीढ़ी बाद, आज फिर से देश के भीतर इस खतरे का पुनरुत्थान देखा जा रहा है. उन्होंने विशेष रूप से देश में आने वाले नए प्रवासियों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ नए लोग ऐसी विचारधाराओं को अपना रहे हैं जो पूरी तरह से अमेरिकी जीवन शैली और मूल्यों के विपरीत हैं. 


ट्रंप ने साफ किया कि यह कोई सामान्य राजनीतिक मतभेद नहीं है, जिसे टैक्स या नियमों में बदलाव जैसे मुद्दों की तरह देखा जाए, बल्कि यह एक गहरी वैचारिक लड़ाई है.


अपने संबोधन को और आक्रामक बनाते हुए राष्ट्रपति ने कम्युनिज्म की तुलना इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों से कर दी. उन्होंने कहा कि कम्युनिज्म आज अमेरिका के लिए प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, पर्ल हार्बर पर हुए हमले और यहाँ तक कि 9/11 के आतंकवादी हमले से भी बड़ा खतरा बन चुका है. 


ट्रंप के अनुसार, इसका कारण यह है कि कम्युनिज्म दुनिया भर के स्वतंत्र लोगों का दुश्मन है, यह अमेरिकी संविधान का विरोधी है और सबसे बढ़कर यह 4 जुलाई 1776 के स्वतंत्रता के सिद्धांतों का सबसे बड़ा शत्रु है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह विचारधारा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए स्वाभाविक रूप से घातक है, क्योंकि जब भी कम्युनिस्ट सत्ता में आते हैं, वे सबसे पहले लोकतंत्र को ही नष्ट कर देते हैं.


ट्रंप ने कम्युनिस्ट सिद्धांतों के नैतिक दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे एक 'ईश्वरहीन' (गॉडलेस) व्यवस्था बताया. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी क्रूर विचारधारा है जो अपने अमानवीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, चाहे इसके लिए कितनी ही बड़ी मानवीय कीमत क्यों न चुकानी पड़े. 


ट्रंप के शब्दों में, कम्युनिज्म जीवन, स्वतंत्रता और खुशी की तलाश का बिल्कुल उल्टा रूप है. यह केवल मृत्यु, तानाशाही और बुराई का मार्ग है. उन्होंने इसे सामूहिक चोरी, सामूहिक नियंत्रण, सामूहिक झूठ और सामूहिक संहार की विचारधारा बताते हुए कहा कि ऐसी सोच को किसी भी लोकतांत्रिक समाज में फलने-फूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती.


अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति ने अमेरिका की ऐतिहासिक विरासत पर सवाल उठाने वालों को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने देश के इतिहास को 'मार्क्सवादी झूठ' के चश्मे से देखने वालों की कड़ी निंदा की और कहा कि जो लोग बच्चों को यह सिखा रहे हैं कि अमेरिका चोरी की जमीन पर बसा है या देश के महानायक शोषक थे, वे केवल इतिहास की निंदा नहीं कर रहे, बल्कि देश के भविष्य पर हमला कर रहे हैं. 


ट्रंप ने राष्ट्रवादियों और कम्युनिस्टों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय में कार्ल मार्क्स के प्रति वफादार और अमेरिकी देशभक्त नहीं हो सकता. उन्होंने संकल्प लिया कि देश के पूर्वजों ने जिन स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए अपना खून बहाया है, उन्हें किसी भी कट्टरपंथी या उपद्रवी गिरोह के हाथों लूटने नहीं दिया जाएगा.


भाषण के अंतिम हिस्से में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए विधायी रणनीति में आमूलचूल बदलाव की मांग की. उन्होंने 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE America Act) को तुरंत पारित कराने के लिए सीनेट में 'फिलिबस्टर' (Filibuster) व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करने का आह्वान किया. ट्रंप ने देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इस विधायी कदम को बेहद अनिवार्य बताया. 


उन्होंने आने वाले चुनावों का जिक्र करते हुए मतदाताओं को सचेत किया कि यदि इस समय बुद्धिमानी से काम लिया जाए और फिलिबस्टर को खत्म करके तुरंत 'सेव अमेरिका एक्ट' के पक्ष में मतदान किया जाए, तो देश आने वाले 100 वर्षों तक कोई चुनाव नहीं हारेगा. ट्रंप ने इस भव्य वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर यह संकल्प दोहराया कि अमेरिकी नागरिक अपनी धरती से कम्युनिज्म को हमेशा के लिए उखाड़ फेंकेंगे और देश को कभी भी कम्युनिस्ट नहीं बनने देंगे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP