क्या अंतरिक्ष से आया है धरती पर जीवन?
नई दिल्ली । डेस्क: ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में वैज्ञानिकों को एक ऐसी कामयाबी मिली है, जो हमारी उत्पत्ति की कहानी बदल सकती है. जापान की अंतरिक्ष एजेंसी 'जाक्सा' (JAXA) के एक ऐतिहासिक मिशन 'हायबुसा-2' ने पृथ्वी से करोड़ों किलोमीटर दूर स्थित 'रयूगु' नाम के एक छोटे से एस्टेरॉयड पर जीवन के सबसे महत्वपूर्ण आधार, यानी डीएनए (DNA) और आरएनए (RNA) के सभी जरूरी हिस्से खोज निकाले हैं.
यह खोज इसलिए खास है क्योंकि यह इस सिद्धांत को मजबूती देती है कि शायद धरती पर जीवन के बीज किसी दूसरे ग्रह या अंतरिक्ष के मलबे के जरिए पहुंचे थे.
रयूगु नाम का यह एस्टेरॉयड मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच मौजूद एस्टेरॉयड पट्टी का हिस्सा है और समय-समय पर पृथ्वी के काफी करीब से गुजरता है. इसी नजदीकी का फायदा उठाते हुए जापान ने साल 2014 में अपना अंतरिक्ष यान रयूगु की ओर भेजा था.
करीब छह साल के लंबे सफर और कठिन मेहनत के बाद, साल 2020 में यह यान रयूगु की सतह को खोदकर वहां की करीब 5.4 ग्राम मिट्टी के नमूने लेकर सुरक्षित धरती पर लौटा. तब से वैज्ञानिक इस बेशकीमती मिट्टी की बारीकी से जांच कर रहे हैं.
हाल ही में जापान के होक्काइडो विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध वैज्ञानिक यासुहिरो ओबा और उनकी टीम ने इस पर एक नया शोध 'नेचर एस्ट्रोनॉमी' पत्रिका में प्रकाशित किया है.
वैज्ञानिकों को रयूगु की मिट्टी में वे पांचों मुख्य यौगिक मिले हैं जिनसे इंसानी और अन्य जीवों का डीएनए और आरएनए बनता है.
इनमें एडेनिन, गुआनिन, साइटोसिन, थायमिन और यूरासिल शामिल हैं. पहले की रिसर्च में केवल कुछ तत्वों के बारे में पता चला था, लेकिन अब पूरी श्रृंखला मिलने से यह साफ हो गया है कि जीवन के निर्माण के लिए जरूरी 'कच्चा माल' हमारे सौरमंडल के अन्य कोनों में भी बिखरा हुआ है.
हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया है कि रयूगु पर इन तत्वों के मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वहां कोई जीव या एलियन रहता है. यह केवल जीवन की नींव रखने वाले रासायनिक तत्व हैं.
वैज्ञानिक तोशिकी कोगा के अनुसार, ये तत्व बस इस बात का प्रमाण हैं कि अंतरिक्ष में जीवन पनपने की बुनियादी परिस्थितियां मौजूद हैं.
यह खोज हमें बताती है कि अरबों साल पहले जब पृथ्वी बन रही थी, तब शायद इन्हीं जैसे ग्रहणुओं की टक्कर से जीवन के ये जरूरी तत्व हमारी धरती पर पहुंचे और धीरे-धीरे विकसित होकर आज के इंसानी स्वरूप तक पहुंचे. यह रिसर्च न केवल विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है, बल्कि आम इंसान को भी यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम इस विशाल ब्रह्मांड में अकेले नहीं हैं.